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रजपुरा में मिले शव की पहचान बदायूं के कृपाल के रूप में हुई

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रजपुरा थाना क्षेत्र के गांव उमेदपुर डांडा के जंगल में हुईं दो हत्याओं का पुलिस जल्द खुलासा करेगी। पुरुष की पहचान बदायूं जिले के थाना उझानी अंतर्गत गांव अचौरा निवासी कृपाल (55) पुत्र नारायन सिंह के रूप में हुई है। कृपाल दर्जी का काम करता था और दिल्ली के गांधी नगर अंतर्गत न्यू चांद मोहल्ला निवासी किरण सोन के साथ दो वर्ष से रह रहा था।
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कृपाल के परिजनों के अनुसार तीन वर्ष पहले वह गांव छोड़कर दिल्ली चला गया था और कई महीने से इस्लामनगर में महिला के साथ रह रहा था। कृपाल की भाभी गंगादेवी ने बताया कि दो महीने पहले जब कृपाल गांव आया था तो उसने इस्लामनगर में घर खरीदने की बात कही थी। बताया कि कृपाल की पत्नी सोनवती की करीब पांच वर्ष पहले मौत हो चुकी है। तीन बेटे व एक बेटी है। बेटी की शादी हो गई है और तीनों बेटे दिल्ली में रहकर मजदूरी करते हैं। कृपाल भी उनके साथ ही रहता था लेकिन दो वर्ष पहले जब महिला के संपर्क में आया तो बेटों से अलग रहने लगा था। बेटे भी कम ही वास्ता रखते थे। अब हत्या क्यों हुई है इसकी जानकारी नहीं है।
गांव के लोगों का कहना है कि कृपाल का स्वभाव बेहद अच्छा था। वहीं दूसरी ओर किरण सोन के ससुरालिया भी रजपुरा थाने पहुंचे और उन्होंने शव देखकर किरण सोने होने की पुष्टि की। मृतका के जेठ देवेंद्र सोन ने बताया कि उनके भाई तीस हजारी कोर्ट में एडवोकेट थे और बीमारी के चलते 2014 में उनकी मौत हो गई थी। उनका एक बेटा है जो गलत संगत में पड़ गया है। बताया कि 2021 में किरण सोन बिना किसी को बताए चली गई थीं। उन्होंने बुलंदशहर जिले के खुर्जा के नजदीक गांव धाकर में पति की कृषि भूमि भी कुछ महीने पहले बेची थी लेकिन वह किसके साथ और कहां रह रही थी इसकी जानकारी नहीं थी।
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35 लाख रुपये की प्रॉपर्टी खरीदने की चर्चा में तो नहीं गई कृपाल और किरण की जान
संभल। कृपाल के बेटे गौरव ने बताया कि उनके पिता इस्लामनगर में 35 लाख रुपये की प्रॉपर्टी खरीद रहे थे। ऐसी जानकारी रिश्तेदार ने दी थी और यह भी बताया था कि उसके पिता ने दर्जी का काम न करके कुछ दिन पूर्व ही कॉस्मेटिक की दुकान कर ली थी और वह किरण सोन के साथ दुकान चला रहे थेे। बेटे ने अंदेशा जताया मुमकिन है कि इसी के चलते किसी ने हत्या की है। बेटे को पुलिस ने दिल्ली से बुलाया है।
महिला ने पति की भूमि अपने नाम आने पर लाखों रुपये की बेची
संभल। महिला के एडवोकेट पति की मौत होने पर गांव की पुश्तैनी कृषि भूमि की वारिस महिला और उसका बेटा बन गए, लेकिन महिला ने बेटे की गलत संगत के चलते अलग कर लिया और गांव की कृषि भूमि को कुछ महीने पहले ही बेच दिया। माना जा रहा है कि उस भूमि से जो लाखों रुपये मिले उन्हीं केे साथ लेकर वह कृपाल के साथ रह रही थी। कृपाल और किरण ने शादी की थी या नहीं इसकी जानकारी किसी को नहीं है। यह दोनों साथ रह रहे थे ये बात सभी रिश्तेदार कह रहे हैं।
रुपयों के लालच में दोनों हत्याएं होने की आशंका
संभल। अब तक की पुलिस छानबीन से जो तथ्य सामने आए हैं। उससे माना जा रहा है कि यह दोनों हत्याएं प्रॉपर्टी और रुपयों के लालच में हुई हैं। महिला के बैग में जो रुपये मिले उससे साफ है कि महिला खर्च के लिए भी काफी रुपये रखती थी। पुलिस सूत्रों की मानें तो इस हत्या में कृपाल के रिश्तेदारों के होने का अंदेशा है। हालांकि पुलिस पुष्टि के लिए करीब आठ-दस लोगों से पूछताछ कर रही है।
बोलेरो कार को ले जाने वाली की तलाश में जुटी पुलिस, मालिक पुलिस के हाथ लगा
संभल। जिस बोलेरो कार को जंगल में घूमते हुए देखा गया। उस तक तो पुलिस पहुंच गई। वह बोलेरो कार जिस व्यक्ति के नाम है उसको तो पकड़ लिया लेकिन उसको जो अब चला रहा है वह पुलिस के हाथ नहीं आया है। अंदेशा है कि इसी कार से वारदात को अंजाम दिया गया है। इस्लामनगर के एक गांव निवासी जिस व्यक्ति को पुलिस ने पकड़ा है उसने बताया है कि बोलेरो कार आदमपुर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति को कई महीने पहले बेच दी थी लेकिन परिचित होने के चलते उसके नाम नहीं कराई है। अभी पुलिस को वह व्यक्ति और कार नहीं मिली है।
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