बबराला। बबराला थाना क्षेत्र के गांव पंवारी में मंगलवार को सुरेंद्र सिंह आर्य की पत्नी मुन्नी देवी आर्य (55) की मृत्यु के बाद शव का दाह संस्कार पूर्णतः वैदिक विधान एवं आर्य समाज की परंपराओं के अनुरूप किया गया। दाह संस्कार में मृतका के भार के बराबर देशी घी, मेवा और हवन सामग्री का प्रयोग किया गया।
आर्य समाजी होने के साथ ही समाज सुधार, शिक्षा तथा नशा मुक्ति जैसे कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे मुन्नी देवी के ससुर मास्टर साधू सिंह ने बताया कि स्वयं मुन्नी देवी गांव के घरों में महिलाओं को इकट्ठा कर साप्ताहिक हवन का आयोजन कराती थीं। बताया कि वैदिक सिद्धांतों में शरीर के भार के अनुरूप पवित्र सामग्री की आहुति को आत्मा की शांति एवं मुक्तिपथ का सूचक माना गया है। इसीलिए मृतका के शरीर का वजन लगभग 70 किलो मानते हुए चिता में 30 किलो देशी घी, 20 किलो हवन सामग्री और 10 किलो मेवा की आहुतियां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दी गईं।
मुन्नी देवी के पति सुरेंद्र सिंह आर्य ने बताया कि अंत्येष्टि स्थल के लिए गांव के निकट स्थित अपने खेत में चौकोर गड्ढा खोदकर उसमें आम की लकड़ी से चिता सजाई गई। वैदिक ऋत्विज़ों के मंत्रोच्चार, यजुर्वेद मंत्रों तथा गायत्री मंत्र के उच्चारण के बीच पार्थिव शरीर को चिता पर लिटाया गया। इसके बाद वैदिक विधि से अग्नि प्रदान कर दाह संस्कार किया गया।
उन्होंने बताया कि मुन्नी देवी को कुछ समय पहले ही बाइपास सर्जरी हुई थी। रविवार को उनकी हालत अचानक बिगड़ी तो उन्हें अलीगढ़ ले जाया गया। डाक्टर के कहने पर सोमवार को घर ले आए थे, जहां उनका निधन हो गया।
आचार्य विजय देव ने बताया कि अंतिम संस्कार में मृतका के शरीर का वजन के बराबर देसी घी मेवा सामग्री का प्रयोग करने से वातावरण में शुद्धिकरण होता है और आत्मा को शांति भी मिलती है।
इस दौरान पूर्व मंत्री अजीत कुमार उर्फ राजू यादव व ब्लॉक प्रमुख हनी यादव, योग मुनि, आचार्य तेजवीर शास्त्री, डॉ कुंवरपाल आर्य, मास्टर साधू सिंह, यशपाल शास्त्री, सुरेंद्र आर्य, यक्ष देव आर्य, हरिगोविन्द सिंह आर्य, तोताराम आर्य, पीतांबर आर्य मौजूद रहे।
मृतका मुन्नी देवी आर्य का फाइल फोटो