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चकबंदी कार्यालय में फरियादी हो रहे परेशान

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संभल के बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी सचेंद्र कुमार सिंह को शासन की ओर से तीन अक्तूबर को निलंबित कर दिया गया था। बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी पर कार्रवाई गंगा एक्सप्रेस-वे की जमीन खरीद में की गई घपलेबाजी के चलते हुई थी। उनके स्थान पर बिजनौर के बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी विजय कुमार को संभल का अतिरिक्त प्रभार शासन ने सौंपा है। वह सप्ताह में दो दिन संभल में कार्य देखेंगे।
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अतिरिक्त प्रभार वाले अधिकारी की तैनाती से अधिवक्ताओं ने सवाल उठाए हैं। कहा है कि फरियादियों को अब परेशानी उठानी पड़ रही है। सुलभ और सस्ता न्याय के दावे हवाई साबित होने की बात कही है। कहना है कि वादकारियों को दोबारा से चक्कर लगाने पड़ेंगे। ऐसे में समय और धन दोनों खर्च होंगे। अधिवक्ताओं का तर्क है कि बंदोबस्त अधिकारी के न्यायालय में जिन फाइलों पर निर्णय आना बाकी था या जिन पर सुनवाई लगभग पूरी हो चुकी थी। अब उन्हें फिर से सुना जाएगा। ऐसे में वादकारी के साथ ही कानूनी तौर पर अधिवक्ता भी परेशान रहेंगे।
बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के न्यायालय में चक अपील सबसे ज्यादा हैं। इन अपील के मामले में सबसे ज्यादा परेशानी होगी। इसके अलावा धारा 11 की अपील और स्थानांतरण वाद, आबादी निर्माण की स्वीकृति आदि के मामले में भी अब लोगों को चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि चक अपील के मामलों में सबसे ज्यादा परेशानी वादकारियों को होगी। क्योंकि कई मामलों में निर्णय आ चुके हैं और काफी मामलों में निर्णय आने बाकी हैं।
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बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के अधूरे निर्णय से वादकारियों को पहले से ही काफी परेशानी थी। अब उनका निलंबन हो गया है तो सभी मामले दोबारा सुने जाएंगे। कार्यवाहक बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी कब न्यायालय में बैठेंगे इसका अभी उन्होंने कोई दिन तय नहीं किया है। जबकि वादकारी परेशान घूम रहे हैं।
प्रदीप कुमार गुप्ता, पूर्व अध्यक्ष, संभल बार एसोसिएशन, संभल
सस्ता और सुलभ न्याय की नीति का पालन चकबंदी न्यायालय में नहीं हो रहा है। बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी पर कार्रवाई के बाद कार्यवाहक बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ने न्यायालय में कोई सुनवाई नहीं की है। जबकि वादकारी अब चक्कर लगा रहे हैं। जो मामले न्यायालय में चल रहे हैं उनकी दोबारा सुनवाई की जानी है। -गय्यूर अहमद, राजस्व के वरिष्ठ अधिवक्ता, संभल
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