चंदौसी। स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी होने के बावजूद कंपनी ने पॉलिसी धारक को उपचार में हुए खर्च की पूरी धनराशि का भुगतान नहीं किया था। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने शिकायत के बाद दोनों पक्षों को सुना और पॉलिसी धारक के पक्ष में निर्णय सुनाया। अब स्वास्थ्य बीमा कंपनी को पॉलिसी धारक को अवशेष 1.86 लाख रुपये की धनराशि का ब्याज सहित भुगतान करें।
अधिवक्ता लव मोहन वार्ष्णेय ने बताया कि चंदौसी निवासी प्रोफेसर अनिरूद्ध कुमार सिंह ने एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी से 2014 में स्वास्थ्य बीमा कराया था। तब से लगातार प्रीमियम भी जमा कर रहा था। कोविड होने पर उन्हें सात मई 2021 को आगरा के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। 17 मई तक चले उपचार में 3.15 हजार रुपये खर्च हुए। दोबारा से कोविड होने पर 21 जून 2021 से 23 जून 2021 तक पुन आगरा के अस्पताल में भर्ती रहा और करीब 38 हजार रुपये खर्च आए। इसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य बीमा कंपनी से इलाज में खर्च हुए 3.53 लाख रुपये की मांग की। जांच पड़ताल के बाद कंपनी ने उन्हें मात्र 1.67 लाख रुपये का भुगतान किया। विरोध जाहिर करने पर बताया कि कुछ मदों से धनराशि को कम किया गया है। जबकि बीमा पॉलिसी खरीदे गए फार्म में इस तरह की कोई भी सूचना अंकित नहीं थी। आरोप है कि विरोध करने पर उन्होंने जांच के बाद शेष 1.86 लाख रुपये धनराशि का भुगतान कराने का आश्वासन दिया। कई बार पत्राचार से शिकायत की, पर कोई समाधान नहीं हुआ। कार्यालय पहुंचने पर उन्होंने शिकायत के बारें में कुछ नहीं बताया और शेष धनराशि देने से मना कर दिया। इसके बाद अनिरूद्ध कुुमार ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में मामले की शिकायत की। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष राम अचल यादव, सदस्य आशुतोष ने दोनों पक्षों की सुनवाई की। इसके बाद उन्होंने बीमा कंपनी एसबीआई जनरल इंश्योरेंस को आदेश दिए कि वह पॉलिसी धारक की अवशेष धनराशि 1.86 लाख रुपये, दस हजार रुपये मानसिक कष्ट, आर्थिक हानि व पांच हजार रुपये वाद व्यय के अदा करे।