सिरसी। हजरत इमाम हुसैन के चेहल्लुम पर सफर के महीने में अजादारी का सिलसिला और तेज हो गया। इमाम बारगाहों और अजाखानों में मजलिसों का सिलसिला जारी है। इस दौरान शबीह-ए-जुलजुन्हा और अलम मुबारक के जुलूस निकाले गए, जिससे माहौल और गमगीन हो गया।
अजाखाना शाहिद हुसैन में हुई मजलिस को खिताब करते हुए शबाहत मेंहदी ने हजरत इमाम हुसैन के भाई और हजरत अली के बेटे हजरत अब्बास अलमदार की वीरता बयान करते हुए कहा कि ऐसे वीर को यजीद की जालिम फौज के एक सिपाही ने छिपकर पीछे से वार करके उनके दोनों बाजुएं काटकर घायल कर दिया था। वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे और नहरे फरात के किनारे शहीद हो गए थे।
मजलिस के बाद हजरत अब्बास अलमदार के बेटे का शबीह-ए-जुलजुन्हा का जुलूस बरामद हुआ। स्थानीय अंजुमनों ने नोहा पढ़ा और मातम किया। जुलूस में छोटे छोटे बच्चों ने जंजीर का मातम किया। मोहल्ला शर्की में लईक हसन के अजाखाने में हुई मजलिस को मौलाना आबिस मेंहदी ने खिताब करते हुए हजरत इमाम हुसैन के फजाइल और मसाइब बयान किए। मजलिस के बाद अलम मुबारक का जुलूस बरामद हुआ, जिसमें अंजुमनों ने नोहा ख्वानी की। जुलूस इमाम बारगाह मोहल्ला शर्की सादात पहुंच कर समाप्त हुआ।