संभल में स्ट्राबेरी को डिब्बों में पैक करते मजदूर।
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पहाड़ी प्रदेशों के रसीले फल स्ट्राबेरी की खेती अब संभल के मैदानी इलाकों में भी आसानी से की जा रही है। अभी तक जम्मू कश्मीर, हिमाचल, नैनीताल, मनाली के आसपास ही इसकी खेती ज्यादा होती रही है, लेकिन संभल क्षेत्र के कई स्थानों पर इसकी खेती की जा रही हैं।
रोजाना करीब 20 क्विंटल स्ट्राबेरी दिल्ली मंडी के लिए सप्लाई किया जा रहा है। कैंसर, शुगर जैसी बीमारियों में यह काम आती है। संभल निवासी मोहम्मद सुबहान का जोया मार्ग पर रायसत्ती के निकट 80 बीघे में खेती कर रहे हैं। वह पुणे से पौधे लाते हैं। अक्तूबर में फसल लगाई जाती है। फरवरी, मार्च में इस फल को तोड़ा जाता है। अन्य फसलों के मुकाबले स्ट्राबेरी की खेती से अच्छा लाभ कमा रहे हैं।
स्ट्राबेरी की खेती इसके लाल, गुलाबी, सुगंधित व पौष्टिक फलों के लिए की जाती है। स्ट्राबेरी का उपयोग जैम, जैली व आइसक्रीम में भी किया जाता है। डा. प्रशांत वार्ष्णेय ने बताया कि ताजा स्ट्राबेरी एक शक्तिशाली प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट है, जो विटामिन सी का बहुत अच्छा स्रोत है। स्ट्राबेरी शीतोष्ण जलवायु वाला फल है।