संभल। चंद्रेश्वर तीर्थ, चंदायन में शनिवार रात्रि 24 कोसीय परिक्रमा के पड़ाव के तहत ठहरे श्रद्धालुओं को स्वागतम कल्कि, शरणागतम कल्कि के भजन ने सराबोर कर दिया। गहरी नींद में सोए श्रद्धालु झूम उठे और भजन गाते नजर आए।
दरअसल, वंश गोपाल तीर्थ से परिक्रमा शुरू कर श्रद्धालु चंद्रेश्वर तीर्थ चंदायन में रात्रि पड़ाव के तहत ठहरे हुए हैं। हजारों की संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं के बीच सजे मंच पर महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि महाराज, कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम, स्वामी भगवत प्रिय महाराज, साध्वी प्राची आर्या, अंतरराष्ट्रीय कथाव्यास अतुल कृष्ण महाराज, महंत हरमनोज दास महाराज, महिला आयोग की सदस्या पुष्पा पांडे का आगमन हुआ। सभी ने भक्तों में जोश भरा।
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने स्वागतम कल्कि, शरणागतम कल्कि भजन गाकर समां बांधा। बताया कि स्वागतम कल्कि, शरणागतम कल्कि का अर्थ है स्वागत है कल्कि, हम आपकी शरण में हैं। यह भगवान कल्कि के स्वागत और उनके प्रति समर्पण को व्यक्त करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक उद्घोष है, जो हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के दसवें और अंतिम अवतार माने जाते हैं।
कल्कि धाम ऐंचोड़ा कंबोह का नाम देवदत्त नगर होना चाहिए : स्वामी यतींद्रानंद गिरि महाराज
संभल। चंद्रेश्वर तीर्थ, चंदायन में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरि महाराज ने कहा कि कल्किधाम ऐंचोड़ा कंबोह का नाम सही नहीं है। कलियुग में भगवान देवाधि देव महादेव, उनको देवदत्त नाम का अर्थ प्रदान करेंगे और उस पर बैठकर कल्कि भगवान धरती पर धर्म की स्थापना करेंगे और धर्म ध्वजा फहराएंगे, ऐसे स्थान का नाम देवदत्त नगर होना चाहिए। महामंडलेश्वर ने इस संबंध में ग्राम पंचायत और मौके पर भाजपा के जिलाध्यक्ष हरेंद्र सिंह से शासन को प्रस्ताव भेजने का आह्वान किया। महामंडलेश्वर ने चौबीस कोसीय परिक्रमा समिति का दायरा बढ़ाने की भी वकालत की। कहा कि यह संभल तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए, इसे पूरे उत्तर प्रदेश में फैलाओं। आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के लोग इस आयोजन का हिस्सा बनें। ऐसी व्यवस्था भविष्य में होनी चाहिए। संवाद