संभल। वर्तमान में सुल्तानपुर जिले में तैनात एसडीएम करम सिंह चौहान पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटकी है। संभल तहसील में वर्ष 2018-19 में तहसीलदार के पद पर करम सिंह चौहान तैनात रहे थे। उसके बाद ही गुन्नौर तबादला हुआ था। संभल तहसील में तैनाती के दौरान एक लेखपाल के साथ सांठगांठ रहने की चर्चा आम रहती थी। उस समय कई जमीनों के निर्णय करने को लेकर लोगों में असंतोष था। गुन्नौर तहसीलदार के पद पर रहते हुए गंगा की जमीन के फर्जी पट्टे प्रकरण में भूमिका सामने आई है।
संभल डीएम अंकित खंडेलवाल ने शासन से करम सिंह चौहान को निलंबित करने की सिफारिश की है। यह तो तय है कि उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई शासन स्तर से की जानी है। वहीं, दूसरी ओर गिरफ्तारी की भी तलवार उन पर लटकी हुई है। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई का कहना है कि जो आरोपी भागे हुए हैं उनकी तलाश की जा रही है। टीम को लगाया गया है।
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गंगा के तट पर पट्टों की बड़ी फेहरिस्त, सफेदपोशों का संरक्षण और पट्टों में मनमानी
गुन्नौर तहसील क्षेत्र में गंगा के तट पर रजपुरा, गुन्नौर और जुनावई ब्लॉक के इलाके में पट्टे बड़ी संख्या में हैं। इन पट्टों के पीछे भी सफेदपोशों का हाथ रहा है। संरक्षण में मनमाने पट्टे वर्षों से हो रहे हैं। 2011 में संभल जिला बना है। इससे पहले गुन्नौर बदायूं जिले का हिस्सा हुआ करता था। तब भी खनन के खेल के लिए पट्टों में मनमानी होती रही है। पट्टों के फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद उन तमाम पट्टों पर भी सवाल उठ रहा है जो पहले से हो रहे हैं। जहां खनन तक हो रहा है। जानकारों का मानना है कि गहनता से जांच पड़ताल की जाए तो बड़ा खेल सामने आ सकता है। इसमें कई सफेदपोश लोगों के रिश्तेदार और परिजन भी पट्टा पाने में शामिल हैं। जो खनन कराते हैं और गंगा के किनारे नोंच रहे हैं। इस पूरे खेल में राजनीतिक संरक्षण बना रहता है।
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इनकी हो चुकी है गिरफ्तारी-
तत्कालीन एसडीएम ओमवीर सिंह, तत्कालीन चकबंदी अधिकारी महेंद्र सिंह व चकबंदी लेखपाल भीमराव सिंह, तत्कालीन राजस्व निरीक्षक राजवीर सिंह एवं पूर्व ग्राम प्रधान असदपुर विक्रांत एवं अधिवक्ता जय भारद्वाज
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इनकी तलाश कर रही है पुलिस-
तत्कालीन गुन्नौर तहसीलदार करम सिंह चौहान वर्तमान में एसडीएम के पद पर सुल्तानपुर जिले में तैनात, चकबंदी अधिकारी सतीश गुप्ता, परवाना अमलदरामद जारी करने वाले सेवानिवृत्त राजस्व निरीक्षक रक्षपाल सिंह, तत्कालीन चकबंदी कर्ता मनवीर सिंह, ग्राम पंचायत सदस्य प्रवीन कुमार, संतोष कुमार, जलधारा, मोहरश्री, किशनलाल, देवेंद्र कुमार, लेखपाल सर्वेश कुमारी, लेखपाल अमित कुमार, लेखपाल ओमकार सिंह।
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चकबंदी प्रक्रिया से खेल शुरू हुआ था- आंकड़ों में समझें
- 12 मार्च 2007 को चकबंदी अधिनियम के प्रकाशन होने के बाद गंगा की भूमि के खाते की कुल 71.5500 हेक्टेयर भूमि को श्रेणी 6 (4) के तहत दर्ज किया गया था।
-अलग-अलग समय में 58 अपात्रों के पट्टे कर दिए गए थे, शिकायत के बाद जांच हुई तो मामला पकड़ा गया।
- वर्ष 2018 में 58 पट्टे निरस्त किए गए और इन 58 पट्टाधारकाें के साथ नौ अधिकारी व कर्मचारियाें के खिलाफ गुन्नौर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इसमें कई आरोपी एक वर्ष पहले ही जेल भेजे गए थे।
- 29 जून 2019 को गंगा के खाते की भूमि को तत्कालीन एसडीएम ओमवीर सिंह द्वारा 162 लोगों के लिए पट्टा स्वीकृत कर दिया गया था।
- 19 मार्च 2020 को चकबंदी विभाग द्वारा बही पर अंकित किया गया था।
- 10 अगस्त 2020 को चकबंदी लेखपाल, चकबंदी कर्ता, सहायक चकबंदी अधिकारी द्वारा राजस्व निरीक्षक कार्यालय की रिपोर्ट प्रेषित की गई थी।
- 29 जून 2019 को चकबंदी अधिकारी को अमल दरामद करने के निर्देश दिए गए थे।
- 21 जनवरी 2022 को गंगा श्रेणी की भूमियों का अमल दरामद किया गया था।
- 31 मार्च 2023 को गंगा की जमीन पर हुए पट्टों में से 17 अपात्र लाभार्थियों के आवंटन निरस्त करने के बाद भी 145 लाभार्थियों के नाम अभिलेखों में दर्ज हैं।
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2007 से चल रही है चकबंदी प्रक्रिया
ग्राम पंचायत असदपुर के गैर आबाद गांव सुखैला में 12 मार्च 2007 से चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। अभी वह पूरी नहीं हुई है। गुन्नौर के एसडीएम विकासचंद्र ने बताया कि चकबंदी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। अब सवाल उठता है कि इतने लंबे समय तक चकबंदी प्रक्रिया गंगा के तल पर बसे गांवों की क्यों पूरी नहीं हो रही है। हालांकि चकबंदी विभाग का यह रवैया पुराना है। वर्षाें तक चकबंदी प्रक्रिया अधर में रहती है और किसानों को मुश्किल का सामना करना पड़ता है।
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राजनीतिक संरक्षण और व्यवस्था की मिलीभगत से छह वर्ष तक नहीं हो सकी थीं गिरफ्तारी
2018 में नौ कर्मचारियों और अधिकारियाें के साथ 58 पट्टाधारकों के खिलाफ अवैध पट्टा करने में गुन्नौर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। साथ ही पट्टे भी निरस्त कर दिए गए थे। इस मामले में रिपोर्ट तो दर्ज की गई लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। छह वर्ष तक एक भी आरोपी गिरफ्तार नहीं किया गया। बल्कि मामला लंबित ही पड़ा रहा। पिछले वर्ष एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने लंबित मामलों की समीक्षा की तो यह फाइल लंबित होने की जानकारी मिली थी। उन्होंने पुराने मामले निस्तारण के आदेश किए थे। इसके बाद चकबंदी लेखपाल और अन्य कई आरोपी जेल भेजे गए थे।
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2018 में दर्ज मुकदमे में आरोपियों की गिरफ्तारी कराकर जेल भेजा जा चुका है। अब यह उसी जमीन पर पट्टा कराने के मामले में दूसरा मुकदमा दर्ज किया गया है। इसमें भी छह आरोपी जेल भेज दिए हैं। अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
-कृष्ण कुमार बिश्नोई, एसपी संभल