जाहिर है कि कुछ दिन बाद लोगों का गला सूखने लगेगा। लेकिन उत्तर प्रदेश जल निगम लोगों के गले को तर करने के लिए फिलहाल तैयार नहीं है। विभागीय बजट नए वित्तीय वर्ष में ही रिलीज होगा। उसके बाद ही सरकारी हैंडपंप रीबोर हो सकेंगे, हालांकि सामान्य खराबियों के लिए इन हैंडपंपों की मरम्मत का कार्य ग्राम पंचायतों को सौंप दिया गया है। विभागीय अभिलेखों में तो अफसरों के पास ही यह आंकड़ा नहीं है कि आखिर कितने हैंडपंप खराब हैं लेकिन अब ग्राम पंचायतों से इसकी रिपोर्ट मांगी गई है।
उत्तर प्रदेश जलनिगम के आंकड़ों के अनुसार जिले के सभी आठ विकास खंडों में कुल 24924 इंडिया मार्का हैंडपंप हैं। पिछले साल 450 इंडिया मार्का हैंडपंप को रीबोर करने का लक्ष्य दिया गया था, जिसे पूरा कर लिया गया है। विधानसभा से पूर्व प्रत्येक विधान सभा क्षेत्र में 100-100 इंडिया मार्का हैंडपंप को दुरुस्त करने का लक्ष्य सौंपा गया था लेकिन हर विधान सभा क्षेत्र दो-दो या चार-चार हैंडपंप ही ठीक कराए जा सके हैं। शेष सभी खराब हैं।
यही हाल नगरों का भी है, शहरी क्षेत्र में पालिका की उदासीनता के कारण बड़ी संख्या में हैंडपंप खराब पड़े हैं, जबकि हर साल लाखों का बजट हर बोर्ड की बैठक में पारित किया जाता है, लेकिन इसके बाद वह कैसे और कहां खर्च किया जाता है, किसी को पता नहीं चलता। पालिका के अधिशासी अधिकारी विकास सेन के अनुसार 128 इंडिया मार्का हैंडपंप हैं, जिसमें पांच रीबोर योग्य हैं, सामान्य तौर पर नगर में कोई हैंडपंप खराब नहीं है, तात्कालिक तौर पर कुछ खराब होते रहते हैं, उन्हें हर माह ठीक कराया जाता है।