चंदौसी। घर-आंगन में कूदती-फुदकी दिखाई देने वाली गौरैया विलुप्त होने की ओर बढ़ रही है। घरों में सुनाई देने वाली गौरैया की चहक अब गायब हो गई है। विकास की दौड़ में पक्के होते मकान और घटती पेड़ पौधों की संख्या ने गौरैया का आवास छीन लिया है। विलुप्त होने की ओर बढ़ रही गौरैया के संरक्षण के लिए वर्ष 2010 से विश्व गौरैया दिवस मनाया जा रहा है।
आवासीय क्षेत्र घटने पर संरक्षण के लिए छह साल पहले लकड़ी का घोंसला बनाने की मुहिम भी काम नहीं आई। इन घोंसलों में गौरैया नहीं लौटी हैं। अब ये विरान हो गए हैं, तो वहीं इनमें से अधिकांश घोंसले गायब हो गए हैं। हैरानी की बात यह है कि संरक्षण की मुहिम में लगा वन विभाग भी घोंसले लगाकर भूल गया है। कितने घोंसले आबाद हुए, इसका विभाग को भी पता नहीं है।
गौरैया के संरक्षण के लिए वर्ष 2015 में शासन ने वन विभाग को लकड़ी के घोंसले बनाकर बांटने के निर्देश दिए हैं।
जनपद संभल में वर्ष 2015 व 2016 में वन विभाग की 200 घोंसले स्वयं व अन्य सामाजिक संगठनों के सहयोग से बनवाए थे। साथ ही चंदौसी में एसएम डिग्री कॉलेज, आयकर विभाग, नगर पालिका, चर्च, एनकेबीएम डिग्री कॉलेज, बहजोई, संभल में कई स्थानों पर घोंसले रखे थे। चंदौसी में रखे गए घोंसलों में अभी तक गौरैया नहीं आई हैं। आयकर विभाग, एनकेबीएम डिग्री कॉलेज, चर्च में कुछ स्थानों पर घोंसले हैं, शेष में से अधिकांश जगहों से घोंसले ही टूटकर गायब हो गए।
वन विभाग का संरक्षण की ओर नहीं ध्यान
शासन के निर्देश पर वन विभाग ने छह साल पहले घोंसले लगवा दिए थे लेकिन उनकी देखरेख व संरक्षण के लिए कोई प्रयास नहीं किए। वन विभाग घोंसले लगवाकर भूल गया। वन अधिकारियों को यह भी मालूम नहीं है कि कितनी जगह पर घोंसले रखे हैं। कहां-कहां पर गौरैया हैं और कहां नहीं है।
यह है गौरैया का प्रमुख प्रवास
आधुनिक बनावट वाले मकानों में गौरैया को अब घोंसले बनाने की जगह नहीं मिलती है। यह गौरैया छोटे पेड़ों, झाड़ियों में भी घोंसला बनाती है। खासतौर से बबूल, कनेर, नींबू, अमरूद, अनार, मेहंदी, बांस आदि के पेड़ों को पसंद करती हैं।
मोबाइल टावर से गौरैया के जीवन पर खतरा
वन विभाग के रेंजर नजाकत हुसैन ने बताया कि अब शहरों व गांवों में सभी जगह मोबाइल टावर आ गए हैं। यह टावर पक्षियों के जीवन के लिए खतरा बने हैं। बताया कि इन टावरों से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणें निकलती हैं, तो गौरैया व अन्य पक्षियों की प्रजनन क्षमता पर असर डालती हैं। इसके अलावा दाना पानी की भी समस्या आ रही है।
हर साल 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है। कुछ साल पहले गौरैया के आवास के लिए लकड़ी के घोंसले लगवाए गए थे। कुछ ही स्थानों को छोड़कर गौरैया अधिकांश स्थानों पर नहीं आई। गौरैया के संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है, साथ ही अपने आसपास उनके घोंसले के लिए भी स्थान बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
कन्हैया सिंह, डीएफओ संभल