उझानी (बदायूं)। जैन मंदिर में चल रहे समवशरण विधान महार्चना के दूसरे दिन बुधवार को देर शाम तक पूजन से लेकर कई कार्यक्रम हुए। सौधर्म इंद्र बने सिद्धार्थ जैन और नगर सेठ जयदीप जैन ने प्रभु के अभिषेक के साथ शांति धारा पूजन किया। विशंक सागर महाराज ने वास्तु शास्त्र का महत्व समझाया। वास्तु शास्त्र के अनुरूप ही कार्य करने की सलाह दी।
मंदिर परिसर में दूसरे दिन के कार्यक्रम प्रात: सात बजे से शुरू हो गए। विशंक सागर महाराज ने प्रभु के अभिषेक और शांति धारा के दौरान पूरे विधान से पूजन कराया। सौधर्म इंद्र बने सिद्धार्थ जैन और नगर सेठ के रूप में जयदीप जैन ने मंत्रोच्चार के बीच प्रभु का अभिषेक किया।
इसके बाद शांति धारा पूजन में महावीर स्वामी के जयकारे गूंजते रहे। मंगल कलश की बोली के आधार पर शीला जैन, अलका जैन, साक्षी जैन और सीमा जैन ने धार्मिक हिस्सेदारी पूरी की। तृप्ति जैन ने दीप स्थापना कराई। विशंक सागर महाराज ने वास्तु शास्त्र के महत्व और विधान के बारे में समझाया।
कहा- वास्तु शास्त्र के विधान के अनुरूप ही कार्य किए जाने चाहिए। महार्चना में जैन समाज के लोगों ने अपने-अपने माता-पिता का पूजन और सम्मान किया। समवशरण में माता-पिता के सम्मान का विशेष महत्व बताया गया है। सांध्य कालीन पूजन के बाद जबलपुर के कलाकारों की ओर से पहले सौधर्म नाटिका प्रस्तुत की गई।
नाटिका में मुख्य पात्रों और अष्टकुमारी के जरिये इंद्र सभा आयोजित की गई। फिर भजन कार्यक्रम चला। भजनों पर भक्त झूम उठे। इस दौरान अनूप जैन, अरुण जैन, सानवी जैन, संगीता जैन, निखिल जैन, संचित, पूजा जैन, मनोज, बबिता, दीपक जैन, विनीत जैन, अनामिका, राकेश जैन, रजनी जैन और शशांक जैन आदि मौजूद रहे।