चंदौसी(संभल)। शीतलहर के कारण बढ़ी गलन ने लोगों को कांपने पर मजबूर कर दिया है। शाम होते ही सड़कों पर आवाजाही काफी कम हो रही है। दुकानदार भी दिन में अपने सामने अंगीठी या हीटर जलाकर बैठ रहे हैं। देर रात तक शहर में रहने वाली रौनक शाम होते ही कम होती जा रही है। रात नौ बजे तक सड़कें सुनसान नजर आने लगीं। इस हाड़ कंपाने वाली सर्दी से हर तबका परेशान है। बहुत जरूरी होने पर ही लोग घरों से निकल रहे हैं। दैनिक मजदूरी करने वालों के सामने तो और बड़ा संकट आ गया है। बृहस्पतिवार को ठंड से बेहाल जनमानस का हाल जानने के लिए लाइव पड़ताल करने निकली संवाद टीम के सामने छात्राें, यात्रियों और मेहनतकशों ने अपनी समस्या साझा की। पेश है लाइव रिपोर्ट-
सुबह 9:30 बजे फव्वारा चौक
बृहस्पतिवार की सुबह 9:30 बजे सबसे पहले टीम शहर के प्रमुख फव्वारा चौक पर पहुंची। यहां सुबह से ही खानपान के ठेले लग जाते और भीड़भाड़ रहती है, लेकिन कड़ाके की सर्दी के कारण चौराहे पर सन्नाटे जैसे स्थिति थी। सिर्फ दो ठेलाें पर खड़े होकर कुछ लोग नाश्ता कर रहे थे। इनमें कुछ बच्चे वो थे जो आसपास के गांवों से हाईस्कूल की प्रीबोर्ड परीक्षा देने के लिए आए थे। इसके अलावा एक दो लोग शहर के थे। चौराहे पर अलाव की कोई व्यवस्था न होने के कारण सभी सर्दी से सिकुड़े नजर आ रहे थे। ठेले पर खस्ता का नाश्ता कर रहे पतरिया गांव से परीक्षा देने आए छात्र ने बताया कि वह बाइक से आया है, सर्दी से हालत खराब हो गई है।
सुबह 9:40 बजे रोडवेज बस स्टैंड
यहां भी सर्दी का असर साफ नजर आ रहा था। जिस स्टैंड पर आम दिनों में यात्रियों की भीड़ नजर आती थी, वहां आज ठंड के कारण सन्नाटा था। हालत यह थी कि बसों के चालक व परिचालकों की संख्या के बराबर भी यात्री नहीं थे। कुछ बसें तो खाली ही मुरादाबाद और बदायूं के लिए रवाना कर दी गईं। कुछ चालक व परिचालक यात्रियों के इंतजार में घंटों से स्टैंड पर खड़े थे। नोएडा जाने वाली बस के परिचालक विमल शर्मा ने बताया कि आम दिनों में यात्रियों से बस भर जाती थी, लेकिन आधा घंटा लेट होने के बाद भी सिर्फ दो तीन सवारियां ही बैठी हैं, वह भी रास्ते की हैं। ऐसे में बसों की आय कम हो गई है, निगम को इन दिनों काफी नुकसान हो रहा है।
सुबह 9:50 बजे रेलवे स्टेशन
रोडवेज के बाद जब टीम रेलवे स्टेशन पर पहुंची तो वहां प्लेटफार्म संख्या एक व दो पर पूरी तरह से सन्नाटा था, जबकि कुछ देर बाद ही अहमदाबाद एक्सप्रेस आने वाली थी। करेंगी गांव के एक बुजुर्ग रामसिंह हाथरस से दवा लेकर आए थे और गांव लौटने के लिए ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। इसके बाद जब स्टेशन से बाहर आई टीम ने मुख्य द्वार के सामने देखा तो ई-रिक्शों की भीड़ लगी थी। सभी रिक्शा खाली थे। एक ई-रिक्शा चालक प्रदीप कुमार ने बताया कि वह सुबह सात बजे से खड़ा है, तीन घंटे में अब तक एक भी सवारी नहीं मिली है। पिछले कई दिनों से ऐसी ही हालत है कि आम दिनों में जहां हजार-आठ सौ की आमदनी हो जाती थी, अब दिनभर में दो-तीन सौ से अधिक की सवारियां नहीं मिल पातीं। दूसरे ई-रिक्शा चालक ज्ञान वार्ष्णेय ने बताया कि ठंड में सवारियां न मिलने से गाड़ी की किस्त भी जमा नहीं हो पाई है।