पनसुखा मिलक गांव के छोटे से किसान परिवार में जन्मे सुधीश कुमार ने जम्मू कश्मीर स्थित पाक बार्डर में देश के लिए कुर्बानी दी है। उनका बलिदान पूरे देश में याद किया जाएगा।
सुधीश के शहीद होने के बारे में परिजनों को शाम साढ़े छह बजे के करीब खबर लग गई लेकिन देर रात्रि तक अधिकतर ग्रामीणों को सुधीश के शहीद होने की जानकारी नहीं थी। सिर्फ परिजन और सुधीश के कुछ दोस्त ही इस बात से वाकिफ थेे। यहां तक कि पत्नी और मां को भी उनके शहीद होने की जानकारी नहीं दी गई थी क्योंकि एकदम से ऐसी जानकारी देना परिजनों ने उचित नहीं माना।
गांव के लोगों से जब सुधीश के शहीद होने के बारे में बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि अभी ऐसी कोई जानकारी नहीं हैं। यहां तक की रात्रि दस बजे तक ग्राम प्रधान को भी जानकारी नहीं थी। हालांकि जिला प्रशासन के पास इस संबंध में जानकारी देर शाम आ गई थी। जिलाधिकारी ने इसके बाद उप जिलाधिकारी और पुलिस प्रशासन के सतर्क किया। गांव में नखासा थाने के प्रभारी केके तिवारी पहुंचे। उन्होंने परिवार वालों से पूरी जानकारी ली। इसके बाद परिवार के प्रति सम्मान व्यक्त किया।