सिरसी में हुई शब्बेदारी में कलाम पढ़ती अंजुमन। संवाद
सिरसी। मोहल्ला सादक सराय में इमाम बारगाह गर्वी में हुई शब्बेदारी में अंजुमनों ने कलाम पेश किए।
इमाम बारगाह में हुई मजलिस में मर्सिया चौधरी बबर अली और उनके साथियों ने पढ़ा। मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना शमीम हैदर कुम्मी ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला में इंसानियत का पैगाम देते हुए अपने परिवार के बच्चे, जवान बेटा और भाई कुर्बान कर दिया। मजलिस के बाद अंजुमन रौनके अजा की ओर से तरही शब्बेदारी प्रारंभ हुई, जिसमें अंजुमन गोहरे अजा ने कलाम पढ़ते हुए कहा ना बुझ सकेगा चराग यह जिक्रे कर्बला का हमेशा से आंधियों की सरहद के पार देखा। अंजुमन जुल्फकारे हैदरी ने कहा पानी बेचैन प्यास चैन से है सब्र का रंग यह नया देखा। अंजुमन हाशमी ने कहा इस तरह तीर को बेशीर ने हंस कर देखा
जैसे ख़ैबर में अली ने दर ए ख़ैबर देखा। इसके अलावा अंजुमन हुसैनी, शमीमे ईमान, बहारे अजा, हैदरी, गुलदस्ते हैदरी, गुंचाये इस्लाम, फेजे पन्जेतनी आदि ने भी कलाम पेश किए। संचालन इस्लाम सिरसवी ने किया। संवाद