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बिना भौगोलिक सत्यापन सीवर लाइन बिछाने में लगा दिए 50 लाख रुपये

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संभल के हल्लू सराय से भैंस नदी तक जाने वाली सीवर लाइन ऐसे अधूरी पड़ी है। - फोटो : SAMBHAL
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संभल। पालिका द्वारा बनाई जा रही सीवर लाइन का कार्य अधर में लटक है। बरसात चल रही है लेकिन जलनिकासी की व्यवस्था नहीं हो सकी। दरअसल जिस सीवर लाइन को दो वर्ष पहले बिछाने का काम शुरू कराया गया उसमें अंतिम परिणाम नहीं निकला। अब हाल यह है कि सीवर लाइन बिछी तो है पर न वे अपने मुकाम तक पहुंची और न नालों से जोड़ी गई। दरअसल यह सीवर लाइन हल्लू सराय में बनाई जा रही है। विलुप्त हो चुकी भैंस नदी तक पहुंचनी है। जानकारों के मुताबिक यह सीवर लाइन बिना भौगोलिक सत्यापन के बनाई गई। इसका नतीजा यह निकला कि ठेकेदार ने कार्य अधर में छोड़ दिया। सवाल यह उठता है यदि सीवर लाइन भैंस नदी तक नहीं पहुंची तो किसानों की फसलों में होने वाले नुकसान की भरपाई कौन करेगा।
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हालांकि किसान लगातार इस योजना के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। सुनवाई नहीं हो सकी। नगर पालिका द्वारा हल्लू सराय में 2018 के दौरान 400 मीटर सीवर लाइन का कार्य शुरू कराया गया। इसकी लागत करीब 50 लाख रुपये तय हुई। तीन महीने के काम के बाद यह कार्य थम गया और अब तक नहीं हो सका। कार्य पूरा नहीं होने के कारण इस इलाके में जलभराव के हालात बने हुए हैं। दो एकड़ से ज्यादा गरीब किसानों के खेत तालाब में तब्दील हो चुके हैं। पीड़ित किसानों ने कार्य पूरा करने और जलभराव से निजात दिलाने के लिए मांग उठाई पर सुनवाई नहीं हुई।
जानकार बताते हैं कि इस सीवर लाइन का कार्य बिना भौगोलिक सत्यापन के कराया गया है। क्योंकि जिस भैंस नदी तक यह सीवर लाइन पहुंचनी है उसका तल सीवर लाइन के तल से कहीं ज्यादा ऊंचा है। इसलिए इस कार्य को बीच में छोड़ा गया। क्योंकि यह कार्य पूर्ण किया जाता तो हकीकत सामने आ जाती। इसलिए बीच में ही लटका दिया गया और जिम्मेदार अधिकारियों ने ठेकेदार का काफी पैमेंट भी कर दिया। अब सवाल उठता है कि बिना भौगोलिक सत्यापन के इस सीवर लाइन को क्यों शुरू कराया गया। शासकीय धन का दुरुपयोग क्यों किया गया।
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अगर हो जाए जांच तो गिर सकती है कई लोगों पर गाज
संभल। सीवर लाइन का कार्य बिना भौगोलिक सत्यापन के कराना और दो वर्ष के बाद भी पूरा नहीं हो पाना बड़ी लापरवाही है। यदि प्रशासन भौगोलिक परीक्षण कराकर तकनीकी जांच कराए तो कई लोगों पर गाज गिर सकती है। क्योंकि जिस जल्दबाजी में यह कार्य शुरू कराया गया और उसको अधर में लटका दिया गया, इसका साफ मकसद शासकीय धन का दुरुपयोग करना है। यदि इसी धन को सही तरीके से इस्तेमाल किया जाता तो जलभराव से लोगों को राहत मिलती और किसानों के खेत तालाब में तब्दील नहीं होते।
ठेकेदार को नोटिस दिया गया है। कार्य पूरा कराने के लिए कहा है। जिससे लोगों की समस्या का समाधान हो जाए। रही बात भौगोलिक परीक्षण की तो उसमें तो कुछ कमी दिखती है। मामला पुराना है इसलिए पहले कार्य पूरा कराना है। - रामपाल सिंह, ईओ, नगर पालिका परिषद संभल।
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