संभल में जंगली पौधे के बीज खाने से हालत बिगड़ने पर जिला अस्पताल में भर्ती बच्चियां।
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नाखासा थाना क्ष्ाेत्र के गांव हजरतनगर गढ़ी के जंगल में गेहूं की बाली बीनने गईं एक ही परिवार की सात बहनों ने बादाम समझकर जंगली पौधे के बीज तोड़कर खा लिए। उल्टी और पेट में दर्द होने पर परिजनों को जानकारी दी। बच्चियों को घर लाकर निजी डॉक्टर से इलाज कराया। बाद में जिला अस्पताल ले गए। इलाज होने पर हालत में सुधार है। यहां एसडीएम और सीओ ने भी जानकारी ली। बीज किस पौधे के थे यह स्पष्ट नहीं हो सका है।
क्षेत्र के गांव हजरतनगर गढ़ी निवासी दलवीर सिंह और शीशपाल चचेरे-तहेरे भाई हैं। दलवीर सिंह की बेटी मनीषा (6 वर्ष), खुशबू (10 वर्ष), कंचन (5 वर्ष) व शीशपाल की बेटी खुशी (5 वर्ष), शीतल (7 वर्ष), मनीषा (5 वर्ष), मानसी (4 वर्ष) गुरुवार को सुबह नौ बजे गेहूं की बाली बीनने के लिए जंगल में गईं।
हजरतनगर गढ़ी से करीब डेढ़ किलो मीटर की दूरी पर एक तालाब के निकट गेहूं के खेत में मासूम गेहूं की बाली बीनने लगीं। कुछ दूरी पर दलवीर सिंह अपने खेत पर फसल की सिंचाई कर रहे थे।
बाली बीनने के बाद मासूम एक-एक करके एक जंगली पौधे से तोड़कर बीज खाने लगीं। स्वाद आने पर समझा कि यह बादाम हैं। बीज खाने से मासूमों के पेट में दर्द होने लगा। मासूम दलवीर सिंह के पास खेत पर पहुंचीं। यहां मनीषा को उल्टी होने लगी। दलवीर सिंह बच्चियों को घर ले गया।
घर पहुंचने के बाद मासूमों के पेट में दर्द के साथ ही उल्टी होने लगीं। परिजन घबरा गए। गांव के ही डाक्टर को बुलाया। इलाज शुरू हुआ लेकिन जब तबीयत में सुधार होता नहीं दिखा तो डाक्टर ने कहीं और ले जाने की सलाह दी। सूचना मिलने पर 108 एंबुलेंस गांव पहुंची। मासूमों को जिला अस्पताल लाया गया।
डाक्टर ने इलाज शुरू किया। मासूमों की हालात में सुधार होने लगा। सूचना मिलने पर उप जिलाधिकारी अमित कुमार व पुलिस क्षेत्राधिकारी सुदेश कुमार भी अस्पताल पहुंचे।
डाक्टर से मासूमों की हालत की जानकारी ली। उन्हें बीज भी दिखाए गए। यह स्पष्ट नहीं हो सका कि बीज किस पौधे के थे।