ग्राम पंचायत सचिवालय तो बनकर तैयार हो गए लेकिन, ज्यादातर में ताला ही पड़ा रहता है। वजह, यहां तैनात किए गए पंचायत सहायक मनमर्जी आते-जाते हैं। छह महीने का अग्रिम मानदेय मिलने के बाद भी वह सचिवालय नहीं पहुंचते हैं। इससे ग्रामीणों के साथ ही ग्राम प्रधान भी परेशान हैं। ग्रामीण जनसेवा केंद्र के चक्कर लगाने के लिए मजबूर हैं।
शासन ने ग्रामीणों की ब्लॉक स्तर तक भागदौड़ खत्म करने के लिए ग्राम पंचायत सचिवालय बनवाए थे। ग्राम पंचायत स्तर पर ही लोगों को जन सुविधा केंद्र की सुविधाएं मिल सकें इसलिए आनन-फानन पंचायत सहायकों की तैनाती भी कर दी गई। हाल यह है कि पंचायत सचिवालय जो पूरी तरह कंप्यूटर समेत अन्य संसाधनों से तैयार हैं और ग्राम पंचायत सहायक की भी तैनाती है, वहां ग्रामीणों को सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। जिले में 670 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें 645 ग्राम पंचायतों में सचिवालय भवन तैयार हैं। कमोबेश सभी में पंचायत सहायक की तैनाती हो चुकी है। पंचायत सहायकों को छह महीने का मानदेय भी ग्राम पंचायत स्तर से अग्रिम भुगतान किया गया है। अब कई पंचायत सहायक ऐसे हैं जो ग्राम पंचायत सचिवालय आते ही नहीं है। ग्रामीण चक्कर लगा रहे हैं या अपने जरूरी कार्य जनसेवा केंद्रों में जाकर करा रहे हैं। मंगलवार को इन ग्राम पंचायतों की पड़ताल की तो बड़ी लापरवाही सामने आई।
जिस ग्राम पंचायत सचिवालय में पंचायत सहायक नहीं आ रहे हैं वहां नोटिस जारी कर जवाब-तलब करना चाहिए। नोटिस का जवाब न मिलने पर अनुबंध खत्म कर देना चाहिए। ऐसी ग्राम पंचायत में दूसरे पंचायत सहायक से प्रस्ताव लेकर नियुक्ति कराई जाएगी। जाहिद हुसैन, डीपीआरओ, संभल।