खंडहर हुई इमारतों में शहर के कुछ प्राइमरी स्कूल संचालित हो रहे हैं। इसमें एक स्कूल ऐसा भी है, जिसमें छत ही नहीं है। बच्चे खुले आसमान के नीचे दीवारों के बीच बैठते हैं। जब बारिश होती है या मौसम खराब होता है तो उनकी छुट्टी कर दी जाती है। वहीं एक स्कूल में इमारत खंडहर होने की वजह से इमारत का पानी परिसर तक आ रहा है।
इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। इन स्कूलों भवनों पर बेसिक शिक्षा परिषद् का स्वामित्व भी नहीं है। जिसके चलते विभाग यहां पर कोई नया निर्माण नहीं करा पा रहा है। नगर शिक्षाधिकारी बबीता सिंह का कहना है कि यदि यह भवन विभाग के होते तो अब तक इन्हें गिरवाकर नए भवन बनवा दिए गए होते।
डूंगर सराय स्थित बाल प्राथमिक विद्यालय में शुक्रवार को दिन में 11.30 बजे इस स्कूल में कोई भी विद्यार्थी नहीं था। सिर्फ एक शिक्षिका बैठी हुई मिली। उनका कहना था कि 85 बच्चे पंजीकृत हैं, लेकिन मौसम खराब होने की वजह से सिर्फ आठ बच्चे आए थे। मध्याह्न अवकाश के बाद वह भी नहीं आए।
मियां सराय स्थित कन्या प्राथमिक विद्यालय में पांचों कक्षाओं के बच्चों को एक की कमरे में बैठाकर पढ़ाया जाता है क्योंकि विद्यालय में कुल दो कमरे हैं। एक कमरा जर्जर है। उसकी छत का प्लास्टर टूट-टूटकर गिरता है। शुक्रवार को 11.45 बजे स्कूल के एक कमरे में सभी कक्षाओं के बच्चे एक साथ बैठे थे। शिक्षक मुशीर अहमद बच्चों को पढ़ा रहे थे। विद्यालय में कुल 73 बच्चे पंजीकृत हैं। जिसमें 40 बच्चे उपस्थित थे।
बालक प्राथमिक विद्यालय सब्जी मंडी के स्कूल का भवन जर्जर है। बच्चों को स्कूल के बरामदे में बैठाकर पढ़ाया जाता है। इस स्कूल भवन के कई हिस्से जर्जर हो चुके हैं। खतरे की वजह से उन्हें बंद कर दिया गया है। बच्चों को सुरक्षित स्थान पर बैठाकर पढ़ाया जाता है लेकिन जहां बच्चे पढ़ते हैं वहां बरसात का पानी भर जाता है। जिससे बीमारी फैलने का अंदेशा है। बच्चों को शौचालय की भी कोई व्यवस्था नहीं है।
खंडहर घोषित हो चुके हैं 17 स्कूल
संभल। संभल नगर क्षेत्र में कुल 41 परिषदीय विद्यालय थे। करीब छह साल पहले 17 विद्यालयों के भवनों को खंडहर घोषित कर दिया गया था। उनमें पढ़ने वाले बच्चों को पास के ही स्कूलों में शिफ्ट किया गया था। इस समय स्कूलों की संख्या घटकर 24 रह गई है। इसमें डूंगर सराय स्थित बिना छत वाला स्कूल शिक्षा विभाग की व्यवस्थाओं की कलई खोल रहा है।