संभल। फसल अवशेष जलाने वाले किसानों से न सिर्फ अर्थदंड वसूला जाएगा, बल्कि उन्हें सम्मान निधि सहित कृषि विभाग की अन्य योजनाओं के लाभ से भी वंचित किया जा सकता है। अब तक जिले में फसल अवशेष जलाने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन पर ढाई-ढाई हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
जनपद में गन्ना और धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है। आमतौर पर किसान गन्ना की छिलाई के बाद उसकी पत्ती जलाते हैं। धान की फसल को कंबाइन हार्वेस्टर से कटवाने वाले कई किसान पराली को जलाकर खेत को अगली फसल के लिए तैयार करते हैं। गन्ने की पत्ती और पराली की जलाने से पर्यावरण में प्रदूषण फैलता है। इसके बावजूद कई किसान फसल अवशेष जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। जनपद में फसल अवशेष जलाने अब तक कई घटनाएं पकड़ी जा चुकी है। संभल तहसील से जुड़ी दो घटनाएं भी शामिल हैं। इन पर ढाई-ढाई हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि विभाग किसानों को निशुल्क वेस्ट डिकंपोजर उपलब्ध करा रहा है। इससे किसान फसल अवशेषों को गलाकर मिट्टी में मिला सकते हैं। इसके अलावा मल्चर आदि कृषि यंत्रों की सहायता से भी पराली को काटकर भूमि में मिलाया जा सकता है। इससे मृदा में जीवांश कार्बन की मात्रा में इजाफा होगा। किसान पराली को गोशाला में देकर वहां से गोबर की खाद भी ले सकते हैं। अरुण कुमार त्रिपाठी, उप निदेशक कृषि