संभल। गंगा एक्सप्रेसवे किनारे खिरनी मोहिउद्दीन के पास औद्योगिक गलियारा दिल्ली और एनसीआर के उद्यमियों के लिए कारोबार विस्तार का सस्ता और बड़ा विकल्प साबित होगा। गलियारे के लिए पहले फेस में खरीदी गई जमीन में ज्यादातर प्लॉट दिल्ली और एनसीआर के उद्यमियों ने लिए हैं, जबकि छोटे प्लॉट न होने पर संभल के उद्यमियों ने प्लॉट नहीं लिए। संभल में विकास की रफ्तार और रोजगार के अवसर बढ़ने का भी मौका बना है।
पहले फेस में क्रय की गई जमीन के प्लॉट आवंटित होने के चलते अब दूसरे फेस में जमीन क्रय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इस बार करीब 300 हेक्टेयर जमीन क्रय की जानी है। पहले फेस में भी गांव खिरनी मोहिउद्दीनपुर, बसला, सारंगपुर और अमावती कुतुबपुर में 240 हेक्टेयर जमीन क्रय की गई थी। फिलहाल औद्योगिक गलियारे में 12500 वर्ग मीटर से कम के प्लॉट नहीं है। 1000 वर्ग मीटर या इससे कुछ ज्यादा बड़ा प्लॉट आवंटित किए जाने की मांग संभल के उद्यमियों ने की थी, जिस पर अभी सहमति नहीं बनी है।
इस समय प्रत्येक वर्ग मीटर के लिए 5000 रुपये की दर तय है। इससे एक प्लॉट की कीमत 6.25 करोड़ होगी। अन्य खर्चों को जोड़ने के बाद कीमत 6.5 करोड़ हो जाएगी। दस किस्तों में ये भुगतान किया जाना है। बुकिंग के लिए पहली किस्त जमा करनी है। औद्योगिक प्लॉट निवेशकों को 99 वर्ष की लंबी अवधि के पट्टे पर आवंटित किए जा रहे हैं।
संभल के मेंथा और फूड प्रोसेसिंग कारोबार के लिए फिलहाल चुनौती
संभल में मेंथा का सबसे बड़ा कारोबार है। यूपी में बाराबंकी और रामपुर के निर्यात को पिछले दो वर्ष से संभल के निर्यातक पछाड़ रहे हैं। इस बार भी इन दोनों जिलों से ज्यादा संभल का निर्यात होने का अनुमान है। हालांकि इसकी पुष्टि अगले दो महीने बाद होगी। वहीं आलू के क्षेत्र में आगरा के बाद बड़ा कारोबार और रकबा संभल में है। फूड प्रोसेसिंग की कई यूनिट लग भी चुकी हैं। चिप्स और अन्य सामान बनाने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनी संभल के किसानों के साथ मिलकर काम करती हैं। ये कंपनी अपना आलू का बीज किसानों को उपलब्ध कराती है और फसल आने पर आलू ले जाती हैं। आलू के बाद अब स्ट्राबेरी का भी रकबा बढ़ा है।
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दिल्ली और एनसीआर के उद्यमियों के लिए संभल सबसे सस्ता
औद्योगिक क्षेत्र दिल्ली और एनसीआर में कई तरह के नियम लागू होने के चलते इकाइयों का स्थापित करना चुनौतीपूर्ण है। हापुड़, मेरठ, अमरोहा में औद्योगिक क्षेत्र में महंगाई है। संभल का औद्योगिक क्षेत्र गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे है और दिल्ली एनसीआर के उद्यमियों के लिए सस्ता भी पड़ रहा है। इसलिए यूपीडा को भी दूसरे फेस के लिए जमीन क्रय करने की आवश्यकता पड़ी है।
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संभल के उद्यमियों ने छोटे प्लॉट के लिए आवेदन किए हैं। यूपीडा अभी छोटे प्लॉट दे नहीं रहा है। पहले फेस की जमीन में ज्यादातर प्लॉट दिल्ली और एनसीआर के उद्यमियों ने लिए हैं। अब दूसरे फेस में जमीन क्रय की जानी है। हो सकता है इसमें संभल के उद्यमियों को छोटे प्लॉट मिल जाएं। हम उद्योग बंधु की बैठक में कई बार मांग उठा चुके हैं। -कमल कौशल वार्ष्णेय, मंडलीय सचिव, आईआईए
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दूसरे फेस में जमीन क्रय की जानी है। संभल के उद्यमियों को भी छोटे प्लॉट आवंटित होने चाहिए। इसके लिए हम पत्राचार कर चुके हैं। छोटे प्लॉट की मांग हमारे सामने उद्योग बंधु की बैठक में आई थी। इसका समाधान कराया जाएगा। -अंकित खंडेलवाल, डीएम संभल