बिलाल की हत्या के मुकदमे में सोमवार को सुनवाई के बाद जमानत अर्जी खारिज हो चुकी है। मंगलवार को अयान की हत्या के मुकदमे में जनपद न्यायाधीश दुर्ग नारायण सिंह के न्यायालय में मुल्ला अफरोज की जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई।
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी ने बताया की अयान की हत्या में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 339/24 में लगाई गई मुल्ला अफरोज की जमानत अर्जी पर मंगलवार को सुनवाई हुई। उक्त मुकदमे के वादी कामिल ने एफआईआर में बताया कि घटना के दिन उसका भाई अयान सिलाई का सामान लेने बाजार जा रहा था। रास्ते में जामा मस्जिद के पास भीड़ लगी थी। भीड़ नारेबाजी कर रही थी। पत्थरबाजी के साथ फायरिंग हो रही थी। जिसमें अयान घायल हो गया। अस्पताल ले जाते समय अयान ने सारी बात बताई। अस्पताल में अयान की मौत हो गई थी।
बताया कि इस मुकदमे में एसआईटी द्वारा जांच की गई और भाई कामिल के फिर से बयान लिए तो कामिल ने बताया कि कुछ लोग घर के बाहर उसके भाई अयान को डाल गए। उसके सीने से खून बह रहा था। उसे मुरादाबाद अस्पताल ले गए। जहां अयान ने बताया कि वह लड़कों के साथ चला गया और उसे गोली लग गई।
इस मुकदमे में दो डॉक्टर्स के भी बयान हुए। जिसमें डॉ. शोभित गुप्ता व डॉ. मुजीब उल्ला ने स्पष्ट किया कि अयान को गोली दो-तीन फीट की दूरी से मारी गई। जबकि पुलिस काफी दूर थी। वहीं अयान को मारी गई गोली 32 बोर की थी। जबकि पुलिस 9 एमएम की गोली का प्रयोग करती है। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुना और मुल्ला अफरोज की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
लग्जरी गाड़ियों की चोरी व विदेशी हथियारों की खरीद फरोख्त करता था मुल्ला अफरोज
जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि मुल्ला अफरोज ने अपने बयानों में स्वीकार किया है कि वह शारिक साटा गैंग का सक्रिय सदस्य है और प्रॉपर्टी का भी काम करता है। दिल्ली और दिल्ली के आसपास से लग्जरी गाड़ी चोरी कर नेपाल, आसाम में बेच देता है। विदेशी हथियारों की भी खरीद फरोख्त करता है। इसके अलावा स्वीकार किया कि वह शारिक साटा से वाट्सएप कॉल व चैट करता था। वह शारिक साटा को कोड वर्ड बस या बॉस के नाम से बुलाता था।
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संभल हिंसा में गुलाम ने मुहैया कराए थे हथियार
जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि मुल्ला अफरोज ने अपने बयानों में ये भी स्वीकार किया है कि 24 नवंबर 2024 को संभल में हुई हिंसा में उसके साथी गुलाम ने ही हथियार मुहैया कराए थे। उस दिन शारिक साटा ने उसे फोन किया कि मुस्लिम समाज के कुछ लोगों को मार गिराने के साथ ही 10-12 पुलिस कर्मियों को मारने भी बात कही थी। इसके बाद गुलाम ने हथियार मुहैया कराए और टीम तैयार की गई।