संभल की जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुए बवाल के आरोप में गिरफ्तार किए 41 लोगों की जमानत की अर्जी पर बृहस्पतिवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश / रेप केसेस एंड पॉक्सो निर्भय नारायण राय की कोर्ट में हुई। कोर्ट ने दो महिलाओं समेत 15 आरोपियों की जमानत खारिज कर दी। अन्य 26 अर्जियों पर चार से सात फरवरी के बीच सुनवाई होगी।
संभल में 24 नवंबर को हुए बवाल को लेकर दर्ज अलग-अलग मुकदमों में पुलिस अब तक 73 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें से 41 ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में जमानत की अर्जी लगाई थी। इन अर्जियों पर बृहस्पतिवार को सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने दो महिलाओं समेत 15 आरोपियों की जमानत की अर्जी खारिज कर दी।
जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुए बवाल में शारिक साटा गिरोह ने बड़ी साजिश रची थी। साटा गिरोह के दो सदस्य मुल्ला अफरोज और वारिस को जेल भेजा जा चुका है। बृहस्पतिवार को न्यायालय में हुई बहस में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता दंगे में साटा गिरोह के सदस्यों के शामिल होने का भी तर्क रखा।
अभियोजन की ओर से कोर्ट में कहा गया कि जामा मस्जिद के आसपास के इलाके में मिले विदेशी खोखे व कारतूस से इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि बवाल में विदेशी ताकतों का हाथ था।
संभल बवाल के 41 आरोपियों की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के एक अधिवक्ता के लैपटॉप लेकर आने का अभियोजन पक्ष ने विरोध किया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि लैपटॉप के माध्यम से वो कुछ तस्वीरें और वीडियो कोर्ट के समक्ष लाना चाहते हैं। अभियोजन की आपत्ति के बाद लैपटॉप कोर्ट से बाहर रखवा दिया गया।
बहस में सीसीटीवी फुटेज का भी हवाला दिया गया। जिसमें आरोपियों के अधिवक्ता ने कहा कि ऐसी कोई फुटेज नहीं है। जिसमें जमानत प्रार्थनापत्र के आरोपियों को फायरिंग करते या पथराव करते हुए दिखाया गया है। वहीं अभियोजन का कहना था कि टीवी चैनलों तक पर पथराव करते लोग दिखाए गए हैं।
अभियोजन की तरफ से कहा गया कि जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने निषेधाज्ञा लागू कर रखी थी। फिर जामा मस्चिद के बाहर भारी संख्या में लोग कैसे जमा हो गए। न्यायालय में जमानत प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई के दौरान इस पर भी बहस की गई।