शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान 24 नवंबर को हुई हिंसा की पड़ताल के लिए गठित न्यायिक आयोग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। तीन सदस्यीय आयोग के दो सदस्य रविवार को संभल पहुंचे और हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर अफसरों से जानकारी ली।
जामा मस्जिद के इमाम आफताब हुसैन वारसी ने कहा, टीम करीब 15 मिनट तक मस्जिद में रही। मस्जिद कमेटी के सचिव मसूद फारूकी ने कहा, टीम ने हमसे कुछ नहीं पूछा। वे अभी सिर्फ घटनास्थल और मस्जिद का मुआयना करने आए हैं। बयान बाद में दर्ज करेंगे।
आयोग के अध्यक्ष देवेंद्र अरोड़ा ने संभल से रवाना होते वक्त कहा कि घटना की तह तक पहुंचा जाएगा। अभी आयोग की टीम ने घटना की प्राथमिक जानकारी हासिल की है और घटनास्थल का मुआयना किया है, ताकि स्थिति को समझा जा सके। अफसरों व आम लोगों के बयान दर्ज किए जाने के साथ सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। इसमें लगभग दो महीने लग सकते हैं।
जामा मस्जिद-नीलकंठ महादेव मंदिर मामले में ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के बयान के बाद मामला गरमा गया है। सोशल मीडिया पर लोग अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। मस्जिद व मंदिर को लेकर दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं।
कौन सही, कौन गलत है यह तो अदालत साक्ष्य व सबूतों के आधार पर तय करेगी। 8 अगस्त 2022 को विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष मुकेश पटेल वाद दायर कर कहा कि जहां पर जामा मस्जिद है, वहां पूर्व में नीलकंठ महादेव का मंदिर था। इसके बाद से कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई।
वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि देश में सर्वे के नाम पर सांप्रदायिक तनाव फैलाया जा रहा है। प्रधानमंत्री को इसे रोकना चाहिए।