संभल जिले के टांडा क्षेत्र में अवैध खनन से खेतों का हो रहा ऐसा हाल।
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भले ही प्रदेश की योगी सरकार अवैध खनन को लेकर गंभीर हो गई हो मगर संभल जिले में इसका असर नहीं दिख रहा। पुलिस और प्रशासन द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण खनन धंधेबाजों के हौसले बुलंद हैं। खनन के नेटवर्क से कई कर्मचारी और अधिकारियों के जुड़े हैं।
शायद यही वजह है कि कार्रवाई के नाम पर सिर्फ रस्म अदायगी हो रही है। अवैध खनन का नेटवर्क नहीं टूट पा रहा है। मिट्टी, बालू और रेता को रात के अंधेरे में जमीन से निकाला जा रहा है। सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अवैध खनन के काले कारोबार पर अंकुश लगाने का फरमान दिया था।
शुरूआत में संभल जिले में इसे लेकर अफसरों में गंभीरता दिखी। मगर बाद में हालात पहले जैसे बनने लगे। वर्तमान में संभल, असमोली, पंवासा, गुन्नौर, चंदौसी, रजपुरा, गवां क्षेत्र में मिट्टी, बालू और रेत का खनन किया जा रहा है। शाम होते ही डंपर और जेसीबी चिह्नित स्थानों का रुख कर लेती हैं और रात भर धरती का सीना चीरकर अवैध खनन किया जा रहा है।
पुलिस जब हाथ डालती लेकिन कुछ नेताओं के दबाव के कारण ही कार्रवाई नहीं कर पाती। हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर में डीएम रहे राकेश कुमार सिंह और राजीव रौतेला को निलंबित करने के आदेश दिए हैं। इन पर नियुक्ति के दौरान अवैध खनन रोकने के हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने का आरोप है।
अब देखना यह है कि इस फैसले से स्थानीय अधिकारी कितना सबक लेते हैं। संभल जिले के अफसर अवैध खनन के काले कारोबार पर अंकुश लगाते हैं या नहीं।