लड़ाई में घाव होने से मर जाते हैं कई मुर्गे
असील नस्ल के मुर्गे लड़ाई के लिए जाने जाते हैं। इसलिए लोगों ने उन्हें लड़ाकर जुआ खेलना शुरू कर दिया है। इन मुर्गों को लड़ाई के लिए तैयार करने से पहले काफी मेवा व अन्य सामग्री खिलाई जाती है। स्टेरॉयड और एड्रेनालाईन बढ़ाने वाली दवाओं का इंजेक्शन लगाया जाता है।
आक्रामकता को बढ़ाने के लिए उन्हें बंद भी रखा जाता है। लड़ाई के दौरान जो मुर्गे जख्मी होते हैं वह अक्सर मर भी जाते हैं। आंखें तो ज्यादातर की खराब हो जाती हैं। बहजोई पुलिस ने जिन मुर्गों को बरामद किया है उनमें भी कई की आंखें जख्मी हैं।
साप्ताहिक बाजार में होता है मुर्गाें की लड़ाई पर जुआ
जिले में ज्यादातर साप्ताहिक बाजार में मुर्गों की लड़ाई पर जुआ खेला जाता है। दूर दराज से लोग अपना अपना मुर्गा लेकर पहुंचते हैं। कई लोग अपने मुर्गों का नाम एक्टर के नाम पर भी रखते हैं। गांव परतापुर और नरौली में शनिवार को साप्ताहिक बाजार लगता है। इन दोनों बाजार में नियमित मुर्गों की लड़ाई कराकर जुआ खेला जाता है।
मुर्गों की लड़ाई कराकर जुआ खेलने की सूचना काफी दिन से मिल रही थी। इसी क्रम में पुलिस ने कार्रवाई की है। 55 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। -कृष्ण कुमार बिश्नोई, एसपी