एक जनवरी 2024 को अजान देने, इमाम को खाना खिलाने, चंदा देने और नमाज अदा करने को लेकर विवाद हो गया था। यह मामला पुलिस तक पहुंचा तो थाने में दोनों पक्षों के बीच कुछ शर्त पर आपसी समझौता हो गया था। शर्त थी कि अजान मस्जिद के इमाम पढ़ेंगे, चंदा सभी से क्षमता के अनुसार लिया जाएगा।
मस्जिद के इमाम का खाना सभी घरों से आएगा। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह व्यवस्था 18 महीने तक चलती रही लेकिन अब मस्जिद के मुतवल्ली अतीक अहमद, उनके बेटे शाने आलम, आमिर, भोलू, हाफिज मारूफ ने नई परंपरा शुरू कर दी। अजान खुद देने लगे।
इसका विरोध किया तो मस्जिद के इमाम का चंदा भी लेना बंद कर दिया और खाना भी खिलाना बंद कर दिया गया। जब विरोध किया तो पूरे परिवार को धमकाया गया है। पलायन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। मस्जिद में नमाज भी अदा नहीं कराई जा रही।
मसलक के साथ बिरादरी के बीच विवाद का आरोप
शिकायतकर्ता वसीम का आरोप है कि वह देवबंदी होने के साथ पिछड़ी जाति से है और आरोपी पक्ष बरेलवी मसलक के साथ तुर्क बिरादरी से आता है। आरोप है कि गांव में उनके परिवार का हर तरह से बहिष्कार किया जा रहा है। पुलिस से गुहार लगाई है कि उसके साथ उसके परिवार को सुरक्षा और मस्जिद में नमाज अदा करने की अनुमति दिलाई जाए।
शिकायतकर्ता ने कार्रवाई की मांग की थी। ऐंचोड़ा कंबोह थाने में मामला दर्ज करा दिया गया है। आगे की छानबीन गहनता से करने के निर्देश दिए हैं। तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। - कृष्ण कुमार बिश्नोई, एसपी, संभल