चंदौसी में भाजपा नेता के झूठे आरोप पर तीन बेगुनाहों को जेल भेजने के मामले में सीजेएम कोर्ट ने सीओ समेत दस पुलिसकर्मियों पर जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने पुलिस से 13 जनवरी तक रिपोर्ट मांगी है। जांच में सामने आया कि नेता ने खुद पर गोली चलवाकर साजिश रची थी।
भाजपा नेता के झूठे आरोप पर तीन बेगुनाहों को जेल भेजने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की कोर्ट ने सीओ डॉ. प्रदीप कुमार सहित दस पुलिस कर्मियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने 13 जनवरी तक पुलिस से रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
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चंदौसी के भाजपा नेता व राशन डीलर प्रेमपाल सिंह ने आरोप लगाया था कि 27 जुलाई 2024 की रात बहजोई से लौटते समय पतरौआ के समीप कुछ लोगों ने उसे गोली मारी है। पुलिस ने इस आरोप में इसी दिन चंदौसी के लोधियान मोहल्ला के दिलीप, हेमंत और श्यामलाल को हिरासत में ले लिया था।
आरोप है कि पुलिस उनको तीन दिनों तक प्रताड़ित किया। फिर जंगल में ले जाकर दिलीप के हाथ में तमंचा देकर वीडियो बनाया और जबरन जुर्म कबूल कराया। इसके बाद में तीनों को जेल भेज दिया। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आदेश पर इस मामले की दोबारा जांच हुई तो सामने आया कि भाजपा नेता ने षडयंत्र के तहत गोली अपने पीठ में इंप्लांट कराई।
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पुलिस की लापरवाही से बेगुनाहों को 40 दिनों तक जेल में रहना पड़ा। पीड़ितों ने पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग की तो सीओ डॉ़. प्रदीप कुमार का तबादला गुन्नौर कर दिया गया। इसके बाद पीड़ितों ने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने तत्कालीन सीओ डॉ प्रदीप कुमार, एसआई रामकुमार सिंह, मियांजान खां, प्रशांत मलिक, मुख्य आरक्षी भूदेव राज, दीपांशु, केशव कुमार, विनोद कुमार, प्रज्ज्वल के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं।