संभल। आजादी के बाद संभल दंगे की आग में बार-बार जला है। कभी अफवाह ने दंगा कराया तो कभी मस्जिद के इमाम की हत्या के बाद दंगा हुआ। दंगों और बवाल की कीमत दोनों समुदाय के दर्जनों लोगों को अपनी जान से चुकानी पड़ी। जब भी दंगा हुआ डरे-सहमे हिंदुओं ने मुस्लिम बहुल इलाकों से पलायन कर लिया था। यहां तक अपने मकान और संपत्ति भी औने-पौने दाम में बेच दिए थे।
सरायतरीन के मोहल्ला कछवायन से पलायन करने वाले सैनी समाज के लोगों ने बताया कि जब 1992 में दंगा हुआ तो दिन-रात भय सताने लगा था। इसलिए धीरे-धीरे सभी परिवारों ने मोहल्ले से पलायन कर लिया। सभी ने अपने मकान बेच दिए और राधा कृष्ण का प्राचीन मंदिर में भी ताला लग गया।
ऋषिपाल सिंह सैनी ने बताया कि मुस्लिम इलाके में मंदिर है। इसलिए किसी ने भी मंदिर को नियमित खोलने की हिम्मत नहीं दिखाई। त्योहार पर ही मंदिर खोला जाता था और पूजन करने के बाद बंद कर दिया जाता था। यह सिलसिला पिछले 32 वर्षों से चल रहा है। बताया कि 1982 में जीर्णोद्धार कराया गया था। बताया कि करीब 200 वर्ष पुराना मंदिर है। इस मंदिर से सैनी समाज की आस्था जुड़ी रही है।
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क्या बोले लोग-
दंगे के बाद हिंदू परिवार पलायन कर गए। मुस्लिम बहुल इलाका होने की वजह से सभी डरे हुए थे। इसलिए जिस दाम में भी मकान और अन्य संपत्ति बिकी उसको बेचकर चले गए। मंदिर खोलने का कोई विरोध तो नहीं हुआ लेकिन मुस्लिम परिवारों के बीच बने इस मंदिर को खोलने में विवाद का डर रहता था। -सुमित कुमार, सरायतरीन
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दंगे के दौरान सभी परिवारों ने पलायन कर दिया। मंदिर पर लगे ताले की चाबी कल्लूराम सैनी के पास रहती थी। रोकटोक कोई नहीं थी लेकिन मुस्लिम बहुल इलाके में पूजा पाठ नियमित नहीं किया गया। अब पुलिस-प्रशासन का सहयोग मिला है तो नियमित पूजन किया जाएगा। -ऋषिपाल सिंह, सरायतरीन
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मोहल्ले से सैनी समाज के लोग धीरे-धीरे कर मकान बेचकर चले गए। मंदिर पर पूजन करने को लेकर कोई विवाद नहीं रहा है। जो ताला लगाया गया था वही ताला लगा रहता था। मंदिर मर्जी से बंद था और मर्जी से खोल लिया। किसी ने कभी कोई आपत्ति नहीं की। -मोहम्मद साईन, सरायतरीन
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सैनी परिवार महंगी जमीन बेचकर चले गए थे और सस्ती जमीन खरीदकर मकान बना लिए। साथ ही खेती की जमीन भी वहीं पर ही खरीद ली थी। मंदिर तो खुलता रहता है। इस मंदिर के खुलने या पूजन होने पर किसी मुस्लिम ने आपत्ति नहीं की। -मोहम्मद असलम, सरायतरीन