बहजोई। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम 2009 के तहत जिले में 270 बच्चों को मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में दाखिला नहीं मिल सका। इससे इन बच्चों के अभिभावक मुश्किल में हैं। वहीं, बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से विद्यालयों में इन बच्चों के दाखिले न होने को लेकर सीट फुल होने का हवाला दिया गया।
बीते माह दिसंबर 2024 में आरटीई के तहत वर्ष 2025-26 के लिए विद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। यह प्रक्रिया लगातार चार माह मार्च 2025 तक चली थी। चारों माह में प्रत्येक माह एक से लेकर 19 तारीख तक विद्यालयों में दाखिले को लेकर ऑनलाइन प्रक्रिया रही थी। इसके बाद 20 से 23 तारीख से बीएसए व बीईओ स्तर से प्राप्त हुए इन ऑनलाइन आवेदनों का सत्यापन किया गया था। इसके बाद 24 तारीख को लॉटरी सिस्टम से बच्चों के दाखिले के विद्यालय के आवंटन की प्रक्रिया हुई। इसके बाद माह की अंतिम तारीख तक जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद लॉटरी में सामने आए विद्यालयों की सूची के आधार पर बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया शुरू हुई थी।
जिला समन्वयक आकाश कुमार ने बताया कि इनमें माह दिसंबर 2024 को आरटीई के तहत विद्यालयों में बच्चों के दाखिले के लिए विभाग को 404 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें सत्यापन के बाद 308 आवेदन सही निकले थे। इसके बाद 276 बच्चों को विद्यालयों में दाखिला मिल गया था और 32 बच्चे विद्यालय में दाखिले से वंचित रहे थे। डीसी ने बताया कि इसी प्रकार माह जनवरी 2025 में 564 आवेदनों की तुलना में 448 आवेदन सही मिले। इनमें से 338 बच्चों को दाखिला मिला था। वहीं, 110 बच्चे दाखिले से वंचित रहे थे। इसके अलावा, माह फरवरी में विभाग को मिले 523 आवेदनों में 486 आवेदन सही मिले थे। इनमें से 383 बच्चों को दाखिला मिल गया था। 103 बच्चों को विद्यालयों में दाखिला नहीं मिला था। साथ ही, माह मार्च में विभाग को 513 आवेदन मिले थे। इनमें 509 आवेदन सही मिले थे। वहीं, 484 बच्चों को विद्यालयों में दाखिला मिल गया था। शेष 25 बच्चे दाखिले से वंचित रहे थे।
उन्होंने बताया कि माह दिसंबर 2024 से मार्च 2025 तक चार माह विभाग को मिले कुल 2004 आवेदनों में से 1751 आवेदन सही मिले थे। शेष 253 आवेदन निरस्त हो गए थे। इसके बाद, सही मिले कुल 1751 आवेदनों में से 1481 बच्चों को विद्यालय में दाखिला मिल गया था। शेष 270 बच्चे विद्यालयों में दाखिले से वंचित रह गए थे। डीसी ने बताया कि विद्यालयों में सीटें फुल होने से इन 270 बच्चों को विद्यालयों में दाखिला नहीं मिल सका था।