सिरसी। सोमवार को अट्ठारह बनी हाशिम के शबीहे ताबूत बरामद किए गए, जो इमाम बारगाह शर्की सादात पहुंचकर सम्पन्न हुए। मोहल्ला शर्की सादात में सोमवार को जव्वार हुसैन के अजाखाने पर आयोजित हुई मजलिस में मरसिया खावर रजा और उनके साथियों ने पढ़ा।
मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना शादाब मेहंदी जाफरी ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन के शहीद होने के बाद यजीद की जालिम फौज ने उनके परिवार वालों को गिरफ्तार कर लिया, जिसमें महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल थे। जालिमों ने बच्चों को ऊंटों की कमर से बांध दिया था। उन्हें लेकर फौज असीर करके कर्बला से कूफा और शाम के रास्तों पर पैदल ही लेकर चली हजरत इमाम हुसैन के बेटे हजरत जैनुल आबेदीन को जंजीरों से जकड़ दिया था। यह सुनकर अजादार फूट-फूट कर रोने लगे।
मजलिस के बाद अंजुमन कारवाने हुसैनी की ओर अट्ठारह बनी हाशिम के शबीहे ताबूत बरामद हुए। जुलूस के दौरान मौलाना मीसम अब्बास सिरसीवी ने तकरीर की। जुलूस स्टेशन रोड से होता हुआ इमाम बारगाह शर्की सादात पहुंच कर समाप्त हुआ। इस दौरान नजाकत हुसैन, नवाब हैदर, हाजी इस्तेखार हुसैन, डा कमाल, अजीम जैदी, मोहम्मद आलम, तनवीर अब्बास, जुल्फकार, मोहम्मद कोनेन जैदी, अली नकी जैदी आदि का सहयोग रहा। संवाद