बैकों के नॉन परफार्मिंग एकाउंट्स में जमा हुई धनराशि का हिसाब किताब अब चेक किया जा रहा है। अगर किसी एनपीए खाते में 8 नवंबर के बाद कालाधन खपाया गया है तो उसके खिलाफ एक्शन होगा। विभिन्न बैंकों से एनपीए एकाउंट्स में जमा हुई धनराशि के ब्योरे के साथ एकाउंट्स नंबर की रिपोर्ट को रिजर्व बैंक ने मांगा है। ऐसा माना जा रहा है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ऐसे एकाउंट्स के बारे में आयकर विभाग से छानबीन कराएगी।
नोटबंदी के बाद कहीं जनधन खातों में तो कहीं लोन के एनपीए हो चुके खाते में बड़े पैमाने पर काला धन खपाए जाने की शिकायतें चर्चा में रही हैं। इसी तरह के शिकायतों के बीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने सभी बैंकों से जनधन और एनपीए खातों में जमा की गई धनराशि का हिसाब मांगा है। एनपीए खातों में जमा की गई धनराशि के बारे में विभिन्न बैंकों को 6 दिसंबर तक रिपोर्ट देनी थी।
बैंक में छुट्टियां होने की वजह से रिपोर्ट तैयार नहीं हो सकी थी। इसे विभिन्न बैंकों ने अब भेजा है। जब बैंकर्स से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने यह जानकारी देने से इनकार किया कि कितने एनपीए खातों में कितनी धनराशि जमा हुई है, लेकिन रिजर्व बैंक द्वारा रिपोर्ट मांगे जाने की पुष्टि जरूर की है। जिले के लीड बैंक मैनेजर सतीश कुमार गुप्ता से जब इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि किस बैंक में कितने एनपीए खाते हैं यह बैंक स्तर से पता लग सकेगा। उनके पास इस संबंध में कोई सूचना कंपाइल नहीं हुई है। हां इतना जरूर है कि रिपोर्ट मांगी गई थी। अधिकतर बैंक इस बारे में रिपोर्ट भेज चुके हैं।
बैंकों में भीड़, कैश नहीं मिला
रजपुरा/गवां। तीन दिन की छुट्टी के बाद बैंक खुली तो भी ग्राहकों को निराश लौटना पड़ा। बैंक में कैश का पर्याप्त इंतजाम नहीं था। इससे ग्राहकों में आक्रोश है। कस्बा रजपुरा की सर्व यूपी बैंक के बाहर सुबह से ही ग्राहकों की लाइन लगनी शुरू हो गई। करीब साढ़े दस बजे करीब ग्राहकों को बैंक में कैश नहीं होने की सूचना मिली तो वह भड़क गये। उन्होंने बैंक के कैशियर को घेर लिया।
इसी बीच रजपुरा पुलिस ने आक्रोशित लोगों को समझा कर शांत किया और कैशियर व अन्य कर्मचारियों को सुरक्षित थाने पहुंचाया। दोपहर तक भीड़ ने बैंक का ताला नहीं खोलने दिया। ग्राहकों का कहना है कि जब बैंक में कैश नहीं था तो नोटिस लगाना चाहिए। ऐसी ठंड में सब काम छोड़कर सुबह से लाइन में लग जाते हैं। इसके बाद भी कैश नहीं मिलता।