भाईचारे और रंगों के त्योहार होली की शुरुआत विशेष रूप से रंग एकादशी से होती है। नगर में श्री रस्तोगी सभा 116 वर्ष से रंग एकादशी की भव्य शोभायात्रा निकालने की परंपरा संजोए हुए है। राधाकृष्ण के सिंहासन और कीर्तन मंडली के साथ शुरू हुई शोभायात्रा आज तक धूमधाम से भव्य रूप से निकाली जाती है। श्री रस्तोगी सभा की ओर से सोमवार को रंग एकादशी पर 116वीं भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। सभा के अध्यक्ष नीरज रस्तोगी ने बताया कि सभा की ओर से वर्ष 1909 से मोहल्ला गोपाल स्थित श्री खेल गोपाल मंदिर से रंग एकादशी की शोभायात्रा की शुरुआत हुई थी। रस्तोगी समाज के लोगों ने ही मंदिर की स्थापना कराई थी। तब ही सही रंग एकादशी पर शोभायात्रा निकालने की परंपरा चली आ रही है। बताते हैं कि शुरुआत में शोभायात्रा में राधाकृष्ण के मुख्य सिंहासन के साथ कीर्तन मंडली होली के भजनों की छटा बिखरते हुए चलती थी। धीरे-धीरे समाज के लोग सभा से जुड़ते गए और शोभायात्रा ने भव्य रूप ले लिया।
सोमवार को भी शोभायात्रा में मुख्य सिंहासन के अलावा महिषासुर मर्दनी की झांकी के साथ अखाड़ा करतब दिखाते हुए चलेगा। काली का खेलता स्वरूप, लट्ठ मार होली, खाटू श्याम बाबा, राधाकृष्ण का बाल स्वरूप समेत अन्य झांकियों के साथ करीब 13 आइटम ढोल ताशे भी शामिल रहेंगे। अबीर गुलाल उड़ाते हुए शोभायात्रा निकाली जाएगी।
खेल गोपाल मंदिर का किया गया जीर्णोद्धार
मोहल्ला गोपाल स्थित श्री खेल गोपाल मंदिर की स्थापना भी श्री रस्तोगी सभा की ओर से समाज के लोगों ने मिल कर कराई थी। मंदिर जर्जर होने पर समाज के लोगों ने ही आपस में चंदा कर वर्ष 2023-24 में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था।
इस
मार्ग से होकर गुजरेगी रंग एकादशी की शोभायात्रा
श्री रस्तोगी सभा की ओर से इस बार 116वीं रंग एकादशी की शोभायात्रा निकाली जाएगी। सोमवार को दोपहर तीन बजे से शोभायात्रा खेल गोपाल मंदिर से शुरू होकर खुर्जा गेट, जवाहर रोड, बड़ा महादेव, घंटाघर, बड़ा बाजार, घास मंडी, ब्रह्म बाजार, कैथल गेट होते हुए पुन: खेल गोपाल मंदिर पहुंच कर समाप्त होगी।
-रस्तोगी समाज की ओर से रंग एकादशी पर शोभायात्रा निकालने की बुजुर्गों की परंपरा को समाज के लोग आज भी निभा रहे हैं। आज शोभायात्रा ने भव्य रूप ले लिया है। समाज के लोगों द्वारा आपस में चंदा कर शोभायात्रा निकाली जाती है। करीब दे लाख से अधिक का खर्च वहन होता है। -नीरज रस्तोगी, अध्यक्ष, श्री रस्तोगी सभा
- रस्तोगी समाज के बुजुर्गों की परंपर को समाज के लोग आज भी जीवंत किए हुए हैं। अन्य समाज के लोग जगह-जगह शोभायात्रा का स्वागत करते हैं। शोभायात्रा से ही रंग खेलने की परंपरा शुरू हो जाती है। परंपरा बरकरार रहे इसके लिए समाज के युवाओं की भी बढ़चढ़ कर भागीदारी रहती है। -रामकृष्ण रस्तोगी, सचिव, श्री रस्तोगी सभा