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रमजान का आखिरी अशरा कल से शुरू, एतकाफ में बैठेंगे रोजेदार

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संभल/ओबरी। रमजानुल मुबारक के तीसरा अशरा शुक्रवार से शुरू हो रहा है। इस अशरे में एतकाफ का अमल किया जाता है। मर्द मस्जिदों में एतकाफ के लिए बैठते हैं। और महिलाएं घरों में एतकाफ पूरा करती हैं। ईद के चांद दिखने पर एतकाफ पूरा माना जाता है।
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एतकाफ में बैठना बहुत अच्छा माना जाता है। ओबरी जामा मस्जिद के इमाम सैयद रिजवान मियां कहते हैं कि एतकाफ में बैठकर अल्लाह की इबादत करने वालों के लिए जन्नत की बशारत हासिल होती है। गुनाहों से पाक हो जाते हैं।
हर एक मस्जिद में एतकाफ के लिए बैठना जरुरी है। बताया कि रमजान में नबी पाक ने पाबंदी के साथ एतकाफ किया। इसलिए इस अमल का बहुत ऊंचा दर्जा है। अल्लाह इंसान के सारे गुनाहों को माफ कर देते हैं और नेकियों में इजाफा होता है। एतकाफ में बैठने वाले को दो हज और एक उमरे का सवाब मिलता है।
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जहन्नुम से निजात का तीसरा अशरा कल से शुरू
संभल। जहन्नुम से निजात का तीसरा अशरा शुक्रवार से शुरू हो जाएगा। उलमा के मुताबिक तीसरे अशरे में खुदा की इबादत करने वालों को जहन्नुम की आग से मुक्ति मिलती है।
मौलाना शहजाद आलम नूरी ने बताया कि रमजान का पूरा महीना ही रहमतों का महीना है। लेकिन सबसे अहम है तीसरा अशरा। क्योंकि इसी अशरे की पाक रातों में यानी 21, 23, 25, 27, 29 रमजान की रातों को कुरान शरीफ नाजिल हुआ था।
इन रातों में से जिस रात को कुरान शरीफ नाजिल हुआ, उसे शब ए कद्र की रात कहते हैं। इसलिए इन रातों की अहमियत काफी मानी जाती है। शबे कद्र की रात को हजार महीने की रातों के बराबर बताया गया है। बताया कि रोजेदार इन पांचों रात को जागकर बारगाह ए इलाही में रहते हैं।
क्या है एतकाफ
इसमें व्यक्ति मसजिद के एक कोने में पर्दा लगा अल्लाह की इबादत करता है। दस दिनों तक वह उठते, बैठते, खाते पीते और यहां तक कि सोते हुए भी 24 घंटे इबादत में मश्गूल रहता है। एतकाफ में व्यक्ति कुरान पाक की तिलावत करता है, नफिल नमाजें अदा करता और तस्बीह पढ़ता है। किसी से मिलता-जुलता नहीं है। जो महिलाएं घरों में एतकाफ के लिए बैठती हैं उनको भी यही एहतियात बरतनी होती है।
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