चंदौसी (संभल)। देश की आजादी की जंग में नगर के क्रांतिकारी जगदीश नारायण सक्सेना का भी बड़ा योगदान था। अंग्रेजी हुकुमत में सजा मिलने पर जेल भेजा गया था।1937 में मुरादाबाद जेल में खराब खाना मिलने पर उन्होंने निरीक्षण के लिए जेल पहुंचे तत्कालीन कलक्टर के मुंह पर थूक दिया था। जिसके बाद उन्हें 11 कोड़े मारने की सजा मिली। तन्हा बैरक में डाल दिया गया था।
चंदौसी में फव्वारा चौक निवासी आलोक सक्सेना ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय जगदीश नारायण सक्सेना 1932 में बदायूं के गांव खेड़ादास से आकर चंदौसी रहने लगे थे। उसी दौरान उसके पिता की मुलाकात क्रांतिकारी प्रो. रामशरण दास से हुई तो वह देश की आजादी की जंग से जुड़ गए। उन्हें आजादी की लड़ाई में धन मुहैया कराने और क्रांतिकारियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी मिली थी। इस दौरान उन्हें 1933, 1937 और 1940 में जेल भी जाना पड़ा था। जेल में कलक्टर से कहासुनी पर उन्हें 11 कोड़े की सजा के बाद शाहजहांपुर की जेल भेज दिया गया था। देश स्वतंत्र होने के 10 साल बाद वह चंदौसी से 1957 में विधायक चुने गए थे।
अंग्रेजों के तार बेचकर जुटाते थे धन
आलोक सक्सेना ने बताया कि उनके पिता पर क्रांतिकारियों के लिए धन मुहैया कराने की जिम्मेदारी थी। बदायूं जनपद के बिसौली निवासी श्याम सिंह की बगिया में बरेली, शाहजहांपुर, चंदौसी, बरेली, बिसौली, मुरादाबाद, बदायूं के क्रांतिकारियों की बैठक होती थी। बैठक के बाद अंग्रेजों के टेलीफोन, बिजली के तारों को लूटा जाता था। इसका उद्देश्य एक तो सरकारी मशीनरी को नुकसान पहुंचाना और दूसरा उसे बेचकर क्रांतिकारियों के लिए धन मुहैया कराना था।
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