संभल। जिसकी उम्मीद थी वह सच साबित होने लगा। पहली बारिश में ही संभल की सोत नदी में पानी दिखने लगा। जबकि वर्षों पहले यह नदी सूख कर विलुप्त हो गई थी और नदी की तमाम जमीन पर अवैध कब्जे हो गए थे। अमर उजाला ने कहां गए जल स्रोत शीर्षक से खबरों की एक श्रंखला चलाई तो प्रशासन ने भी गंभीरता दिखाई। जिलाधिकारी अनिवाश कृष्ण सिंह आगे आए।
उन्होंने उप जिलाधिकारी और राजस्व कर्मचारियों को खुदाई के लिए सक्रिय किया। मनरेगा में मजदूरों को लगाया। सामाजिक संगठनों ने भी उत्साह दिखाया। नदी की खुदाई 15 जून को शुरू हो गई। अब नदी का करीब 20 किलोमीटर हिस्सा खुद चुका है। इसमें कई स्थानों पर पानी नजर आ रहा है। उसमें एक स्थान फिरोजपुर का है। यहां पानी देखकर किसानों के चेहरे खिल गए हैं।
मेहनत को सफलता मिल रही है। सोत नदी में वर्षों बाद पानी नजर आ रहा है। उप जिलाधिकारी दीपेंद्र यादव ने सोमवार को सोत नदी की खुदाई का जायजा लिया। मौके पर जाकर देखा कि आसपास के गांवों में होने वाली बारिश का पानी किस तरह से नदी में आएगा। साथ ही खुदाई को रफ्तार देने के लिए भी उन्होंने विचार विमर्श किया है।
फिरोजपुर पुल के करीब सोत नदी में बारिश का पानी दिखने लगा है।
नदी में पानी देखकर आसपास के किसान खुश नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि नदी में अगर पानी बना रहा तो सिंचाईं में मदद मिलेगी। वहीं बारिश के चलते मिट्टी और कीचड़ होने से इस्माइलपुर, फुलसिंहा और मोहम्मदपुर मालिनी में सोमवार को खुदाई नहीं हो सकी। यही स्थिति असमोली क्षेत्र मातीपुर, दरियापुर बंद, रचैटा और मलकपुर नेवादा में खुदाई नहीं हो सकी।
इस क्षेत्र के कानूनगो चंद्रपाल ने बताया कि मातीपुर में पानी भर गया जिससे जेसीबी नहीं चल सकी। उन्होंने बताया कि बारिश ने खुदाई के काम को रोका है। थोड़ी जमीन सूखेगी की तो फिर से नदी की खुदाई में तेजी आएगी लेकिन यह अच्छी बात है कि नदी अब अपना आकार लेने लगी है। कहीं कहीं उसमें बारिश का पानी भी एकत्र हो रहा है।