संभल। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में संभल में सार्वजनिक संपत्ति को काफी क्षति हुई। इस क्षति की रकम की वसूली के लिए अपर जिलाधिकारी कमलेश कुमार अवस्थी ने अब तक 70 लोगों को नोटिस जारी किए हैं। इसमें से 59 लोगों को जवाब दाखिल करने की तारीख नौ जनवरी और 11 लोगों के लिए 13 जनवरी की तिथि नियत की गई है। इसमें 59 लोगों के जवाब गुरुवार को दाखिल होने की उम्मीद की जा रही है। अपर जिलाधिकारी की अदालत में इन जवाबों का परीक्षण होगा। जवाब संतुष्टि पूर्ण नहीं होने पर वसूली के लिए अगली कार्रवाई की जाएगी। संभल जिले के 70 लोगों से 19,31,565 की वसूली होनी है। वसूली की प्रक्रिया एक महीने में पूरी किए जाने के निर्देश हैं। अगर कोई व्यक्ति दोषी होने के बाद भी धनराशि जमा नहीं करता है तो उसके खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी की जाएगी। भू-राजस्व की तरह धनराशि की वसूली होगी।
संभल में 19 और 20 दिसंबर को नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन हुए थे। इसी दौरान तोड़फोड़, आगजनी और हिंसा की घटनाएं हुईं थीं। बवाल के दौरान हुई फायरिंग में दो लोगों की जान चली गई थी। निर्देशों के क्रम में जिला प्रशासन की ओर से अपर जिलाधिकारी ने 70 लोगों के खिलाफ नोटिस जारी किए हैं। यह सभी नोटिस कोतवाली पुलिस और नखासा थाना पुलिस की ओर से अपर जिलाधिकारी के पास भेजी गई आख्या के आधार पर जारी किए गए हैं। अपर जिलाधिकारी कमलेश कुमार अवस्थी गुरुवार को नोटिस के संबंध में आने वाले जवाब का परीक्षण करेंगे। इसके बाद अगली कार्रवाई के आदेश जारी करेंगे।
कार्रवाई पर उठे सवाल, जो नहीं थे बवाल में उन्हें भी मिले हैं नोटिस
संभल। जो लोग बवाल के दौरान कहीं नजर नहीं आए। न ही उन्हें उकसाने का दोषी पाया गया है, उन लोगों के नाम भी पुलिस की आख्या में आए हैं। इस पर अपर जिलाधिकारी ने वसूली के नोटिस जारी किए हैं। संभल के कई उलेमा इस मुद्दे को अधिकारियों के सामने उठा चुके हैं। नोटिस ऐसे कई लोगों को भी मिले हैं, जो बवाल के समय घटनास्थल पर ही नहीं थे। न ही किसी सीसीटीवी कैमरे की रिकार्डिंग में उनके चेहरे आए हैं। इससे भी बड़ी बात यह है कि कुछ लोग तो ऐसे हैं जिनसे पुलिस प्रशासन शांति व्यवस्था के लिए सहयोग लेता रहा है। लेकिन जब बवाल हो गया तो उन्हें ही आरोपी बना दिया गया। इस हालात में तमाम लोगों की निगाह, पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर लगी हुई है। सवाल यह है कि निर्दोष लोगों को छोड़ा जाता है या फिर दोषी मानते हुए कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाता है। वैसे जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के सामने निर्दोष लोगों पर कार्रवाई न करने का आग्रह कई बार किया जा चुका है। अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि किसी भी निर्दोष के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी पर दोषी लोग छोड़े भी नहीं जाएंगे।