चंदौसी। जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) देशभर में जुलाई-2017 से लागू किया गया। लेकिन अधिक जानकारी नहीं होने के कारण इसका रिटर्न भरने में शुरूआती समय में व्यापारियों से बड़ी संख्या में गलतियां हुईं। इसका वार्षिक रिटर्न भरने की तिथि को कई बार बढ़ाया गया लेकिन अब रिटर्न भरने की अंतिम तिथि सात फरवरी-2020 है। लेकिन अभी तक भी शुरुआत में हुई गलतियों को सुधारने का कोई विकल्प नहीं दिया गया है। जिससे व्यापारियों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ सकती है।
जीएसटी को एक जुलाई-2017 से देश में लागू किया गया। जीएसटी में व्यापारियों के हर माह दो तरह के रिटर्न दाखिल करने होते हैं। पहला जीएसटी आर-3बी, जिसमें टैक्स की जानकारी भरनी होती है। दूसरा जीएसटी आर-1, जिसमें बिक्री की जानकारी देनी होती है। उसके बाद साल के अंत में एक बार वार्षिक रिटर्न भी भरना होता है। वार्षिक रिटर्न व मासिक रिटर्न में समानता होनी चाहिए।
चूंकि जीएसटी जुलाई माह में लागू की गई तो जुलाई से 31 मार्च-2018 तक नौ महीने का ही वित्तीय वर्ष माना गया। लेकिन इसमें मासिक रिटर्न भरते समय व्यापारियों से कई गड़बड़ियां हो गई हैं। इससे पहले वैट में वार्षिक रिटर्न भरते समय पिछले दो समय के रिटर्न को सुधारने का विकल्प मिलता था। लेकिन लगातार व्यापारी जीएसटी में भी रिटर्न भरने में हुई त्रुटियों को दुरुस्त करने का विकल्प देने की मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार इसके प्रति गंभीर नजर नहीं आ रही है।
जो विकल्प दिया, उसमें यदि सरकार का धन व्यापारी पर निकल रहा है तब तो सरकार ले लेगी लेकिन व्यापारियों का धन सरकार पर निकल रहा है तो उसकी वापसी की कोई व्यवस्था नहीं है। जिससे देशभर के व्यापारियों को बड़ी आर्थिक क्षति हो सकती है। अब सात फरवरी की अंतिम तिथि है। यदि अंतिम तारीख नहीं बढ़ी तो व्यापारियों को लाखों की क्षति पहुंचेगी।