वे लोहे के फाटक की ओर भागीं इसलिए उनकी जिंदगी बच गई। मृतक की बेटी सुरीति के मुताबिक घटना के पीछे ग्राम प्रधानी की रंजिश तो थी ही लेकिन साथ ही मृतक सुशील सिंह की शादी दूसरे पक्ष की बेटी से होनी वाली थी, बारात 26 नवंबर को आनी थी।
सुरीति ने बताया कि उसके भाई सुशील की शादी पहले हो चुकी थी लेकिन चंदरपुर गांव निवासी उसकी पत्नी नन्हीं जो चंदरपुर गांव की है, उससे अलगाव हो गया है, वह अपने मायके में रहती थी। दूसरे पक्ष से प्रधानी के चुनाव को लेकर रंजिश चल रही थी। चुनाव के दौरान भी सुशील की हत्या की साजिश रची गई थी। इसलिए चुनाव में सुशील को प्रचार करने के लिए भी नहीं निकलने दिया गया था।
इस बीच सुशील का दूसरे पक्ष की युवती से प्रेम प्रसंग हो गया था।
कोर्ट मैरिज भी कर ली थी। दूसरे पक्ष को जब यह बात पता चली तो पहले तो आक्रोश जताया लेकिन फिर वह शादी के लिए तैयार हो गए। 26 नवंबर को शादी की तिथि भी तय कर दी गई। गोविंदा दूसरे पक्ष का ही युवक है, जो शाम को उसके घर सात बजे तक बैठा था। प्रधान परिवार तो दूसरे पक्ष की बात सच मानकर शादी की तैयारियां करने लगा था लेकिन दूसरा शादी की बात करके बदला लेने के लिए मेलजोल बढ़ा था।
शाम को सात बजे तक घर बैठा गोविंदा शायद घर की स्थिति को भांपने के लिए बैठा था, उसके जाने के आधे घंटे बाद ही हमला कर सभी को खत्म कर दिया गया। जिस तरह सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया गया, उससे लगता है कि तैयारी काफी दिनों से की जा रही थी। शाम को प्रधान के घर में गोविंदा को भेजकर रेकी कराई।