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Sambhal News: नहीं रोक पाई थी पुलिस, नगर में निकाली थी राम ज्याेति यात्रा

Wed, 17 Jan 2024 04:08 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
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चंदौसी (संभल)। अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर माहौल राममय हो रहा है। चंदौसी समेत पूरे जिले में हिंदू संगठन के कार्यकर्ता घर-घर अक्षत वितरण कर रहे हैं। 22 जनवरी को दीपावली मनाने का आह्वान कर रहे हैं। वहीं कारसेवक मंदिर के लिए किए गए संघर्ष को याद कर रहे हैं।
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चंदौसी के गणेश कॉलोनी निवासी हरिद्वारी लाल मिश्रा ने बताया कि वर्ष 1990 में राम ज्योति यात्रा बिलारी से चंदौसी होते हुए बहजोई के लिए रवाना होनी थी। लोगों में राम ज्योति के प्रति अधिक उत्साह था। राम ज्योति जब रघुनाथ आश्रम पहुंची तो लोगों ने निर्णय लिया कि राम ज्योति चंदौसी के मुख्य मार्गाें से होकर निकाली जाएगी। पुलिस राम ज्योति को शहर में घुमाने से रोक रही थी। मुझे राम ज्योति के आगे भजन कीर्तन करते हुए मंडली के साथ चलना था। एक रथ पर राम ज्योति रखी थी। उसके आगे एक ठेले पर राम नाम का कीर्तन चल रहा था। अचानक भीड़ ने निर्णय लिया कि राम त्योति सीता रोड होते हुए ब्रह्म बाजार, घंटाघर, फव्वारा चौक, स्टेशन रोड से होते हुए बहजाेई रोड को जाएगी। जैसे ही राम ज्योति व भजन कीर्तन का ठेला गणेश मंदिर पहुंचा पुलिस ने आगे जाने से रोक दिया। भीड़ मुख्य बाजार में राम ज्योति को ले जाने की जिद पर अड़ गई। जिस पर पुलिस ने रामभक्तों पर लाठी चार्ज कर दिया। जैसे ही उन्हें मौका मिला वह पुलिस के नजरों से बचते हुए राम ज्योति और भजन कीर्तन के ठेले को ब्रह्म बाजार तक ले गए। जैसे ही रामभक्तों पर लाठी चार्ज होने की जानकारी शहर में लोगों को हुई तो हजारों की संख्या में भीड़ एकत्र हो गई। जय श्रीराम के नारे गूंजने लगे। भीड़ ने बाजार में ही धरना शुरू कर दिया। पुलिस ने हालात देखते हुए राम ज्योति यात्रा को शहर के मुख्य मार्ग से निकालने की अनुमति दी। इस तरह राम ज्योति शहर के मुख्य मार्गाें से होते हुए बहजोई को रवाना हो गई। हरिद्वारी लाल मिश्रा विश्व हिंदू परिषद के पूर्व नगराध्यक्ष हैं।


जेल में लगाई शाखा, भजन कीर्तन और चर्चा के बीच गुजरता था दिन


चंदौसी (संभल)। 500 वर्ष पुराना सपना है, जो 22 जनवरी को पूरा होगा। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर रजपुरा के 74 वर्षीय सागरमल गुप्ता पुराने समय को याद करते बताते हैं कि कल्याण सिंह के नेतृत्व में राम मंदिर का आंदोलन का जुनून सभी के सिर पर सवार था। कारसेवा के लिए वे खुद अपने साथियों के साथ अयोध्या जाने की तैयारी कर रहे थे। 13 अक्टूबर को उन्हें रजपुरा पुलिस ने बहाने से थाने बुलाया। यहां पहले से ही कई ओर साथी बैठे हुए थे। मुझे व गवां के ठाकुरदास अग्रवाल समेत चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर पीलीभीत जेल भेज दिया। यहां पहले दिन तो जेल परेशानी हुई। इसके बाद रामभक्तों की संख्या जेल में बढ़ने लगी। हमारे साथ पूर्व विधायक प्रेमस्वरूप पाठक भी बंद थे। जिन्होंने जेल अधीक्षक से खराब खाना मिलने की शिकायत की। इसके बाद सभी को आईटीआई कॉलेज की अस्थाई जेल में भेज दिया गया। यहां चार पांच दिन वह रहे। इसके बाद फिर पीलीभीत जेल में बंद कर दिया गया। वह बताते हैं कि जेल में उन्होंने रामभक्तों के साथ शाखा लगानी शुरू कर दी। दोपहर में खाना खाने के बाद विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होती थी। शाम को फिर भजन कीर्तन के माध्यम से श्रीराम का गुणगान होता है। करीब 26 दिन बाद उन्हें जेल से रेहा कर दिया गया। सागरमल गुप्ता रजपुरा में संघ के पूर्व स्वयंसेवक रहे हैं।
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