संभल। अंतर्राष्ट्रीय साहित्य कला संगम की ओर से विश्व गौरेया दिवस एवं विश्व कविता दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया गया। रविवार को डा. डीएन शर्मा के आवास पर आयोजित कार्यक्रम में अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संस्था के अध्यक्ष डा. विजय लक्ष्मी शर्मा ने सरस्वती वंदना व भारत वंदना प्रस्तुत की। संध्या रस्तोगी ने गौ सेवा प्रक्रिया दी। संस्थापक डा. डीएन शर्मा ने कहा कि इस भूमंडल पर जितनी भी प्रमुख भाषाएं हैं उनमें कविता ही जनप्रेरणा का सशक्त माध्यम रही है।
कविता कवि की आत्मा की आवाज होती है जो हृदय के मार्ग से निकलने के कारण व्यापक रूप जन स्पर्शी बन गहरा परिवर्तन लाती है। कहा की कविता की इसी शक्ति को पहचान कर संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1999 में विश्व स्तर पर कविता के महत्व को स्वीकार किया और 21 मार्च को विश्व कविता दिवस घोषित किया।
साथ ही विश्व भर के कवियों तथा उनकी कविताओं को सम्मान दिया गया। उन्होंने अपनी कविता गौरेया मुझसे क्यों डरती है सुना कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। संरक्षक कमल कांत तिवारी ने बताया कि सन 2010 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस के रूप में मनाया जाने की घोषणा की। तब से गोरैया तथा अन्य लुप्त प्रजाति के पक्षियों के संरक्षण का भाव विश्व जाग रहा है। इस दौरान कवि राजेंद्र कुमार शर्मा, योगेंद्र शर्मा, क्षमा दुबे, मनोज कुमार रस्तोगी, पूजा शर्मा देवांश नंदन शर्मा, श्रेया शर्मा, अखिल वर्मा, तुषार शर्मा आदि मौजूद रहे। संचालन नीरू गुप्ता ने किया।