संभल। गंगा एक्सप्रेसवे किनारे खिरनी जंक्शन के निकट विकसित होने वाले औद्योगिक गलियारे में यूपीडा (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण) ने प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया को शुरू कर दी है। जिले के तीन से चार बड़े उद्यमियों ने प्लॉट बुक भी करा दिए हैं। पहली किस्त भी जमा कर दी गई है। इस आवंटन प्रक्रिया का असर जिले के छोटे व मध्यम उद्यमियों पर पड़ा है क्योंकि जो बड़े उद्यमी हैं वह तो प्लॉट बुक करा सकते हैं लेकिन जो छोटे या मध्यम उद्यमी हैं वह मायूस हैं।
दरअसल यूपीडा ने 12500 स्क्वायर मीटर प्लॉट का साइज तय किया है। इसमें 4640 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर तय है। इस प्लॉट को पाने के लिए 5.80 करोड़ रुपये चुकाने होंगे। इसके अलावा अन्य खर्च को लगाकर छह करोड़ रुपये में 99 वर्ष की लीज पर प्लॉट आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू की है। इससे छोटा प्लॉट अभी तक आवंटित करने की कोई योजना नहीं है। छह करोड़ रुपये पांच वर्ष के दौरान 10 किस्तों में अदा करने हैं। बुकिंग के लिए पहली किस्त जमा कराई जा रही है।
आईआईए की ओर से इसका विरोध शुरू कर दिया गया है। आईआईए का तर्क है कि जिले में छोटे व मध्यम उद्यमियों की संख्या ज्यादा है और उनको ही अभी आवंटन की प्रक्रिया से वंचित रखा गया है। आईआईए के मंडलीय सचिव कमल कौशल वार्ष्णेय ने बताया कि डीएम के माध्यम से शासन में मांग की है कि छोटे प्लॉट आवंटित किए जाने चाहिए। इसमें भी जिले के उद्यमियों को प्राथमिकता दी जाए।
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240 हेक्टेयर भूमि में विकसित होना है औद्योगिक गलियारा
गंगा एक्सप्रेस-वे किनारे गांव खिरनी मोहिउद्दीनपुर, बसला, सारंगपुर और अमावती कुतुबपुर में करीब 240 हेक्टेयर भूमि पर औद्योगिक गलियारा विकसित होना है। इसी वर्ष किसानों से प्रशासन ने फसल की बुआई नहीं करने की अपील की थी। क्योंकि प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया शुरू हो गई है तो विकसित किए जाने की प्रक्रिया भी जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है।
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हड्डी-सींग के हस्तशिल्प आइटम और मेंथा कारोबार है संभल की पहचान
संभल में तैयार होने वाले हड्डी व सींग के हस्तशिल्प आइटम तो दुनियाभर में अपनी चमक बिखेर रहे हैं। इसके अलावा मेंथा निर्यात भी दुनिया के कई देशों में किया जाता है। हालांकि यह कारोबार बड़ा जरूर है लेकिन इकाइयां ज्यादातर छोटी लगी हैं। औद्योगिक गलियारे में छोटे प्लॉट का आवंटन नहीं किया गया तो इन इकाइयों के सामने संकट मंडराएगा। शहरी क्षेत्र से धीरे-धीरे इन इकाइयों को शहर से बाहर जाना है। यदि औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित किया जाए तो इन इकाइयों के कारोबार को पंख लग जाएंगे।
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मेंथा कारोबार को जाना है शहर से बाहर, औद्योगिक गलियारे में नहीं मिली जगह तो संकट मंडराएगा
प्रशासन मेंथा कारोबारियों के साथ संवाद कर इकाइयों को शहर से बाहर ले जाने का आग्रह कर चुका है। संभल और चंदौसी शहर में इकाइयां शहरी क्षेत्र में संचालित होती हैं। ऐसे में हादसों का खतरा मंडराता रहता है। इसके चलते ही प्रशासन की ओर से आग्रह किया गया है कि इकाइयों को शहरी क्षेत्र से बाहर स्थापित किया जाए। ऐसे में कारोबारियों की उम्मीद जगी थी कि औद्योगिक गलियारे में इन इकाइयों को स्थापित किया जा सकता है। लेकिन प्लॉट छोटे आवंटित नहीं किए जा रहे हैं। आईआईए के पूर्व चैप्टर चेयरमैन अरविंद अरोरा ने बताया कि वह प्रशासन के सामने और अलग-अलग बैठकों के दौरान यह मांग उठा चुके हैं कि छोटी इकाइयों के लिए भी यूपीडा को प्लॉट आवंटित करने चाहिए। क्योंकि जिले में ज्यादातर छोटे और मध्यम उद्यमी हैं।
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बड़े प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया शुरू की गई है। जिले के उद्यमियों ने बुकिंग के तौर पर पहली किस्त की राशि जमा भी कर दी है। हमारी मांग है कि छोटे प्लॉट जो 2000 स्क्वायर मीटर के होने चाहिए। वह छोटे उद्यमियों को आवंटित किए जाएं और किस्त का समय बढ़ाया जाए। इसके लिए शासन को पत्र भी भेजा गया है।
कमल कौशल वार्ष्णेय, मंडलीय सचिव, आईआईए