संभल। जिला अस्पताल में एंटी वेनम इंजेक्शन की जगह एंटी रेबीज इंजेक्शन बच्चे को लगाने के मामले में जिला अस्पताल के फार्मासिस्ट मनोज कुमार की लापरवाही सामने आई है। यूपी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशक के आदेश पर निलंबित कर दिया गया है। यह आदेश सिटी मजिस्ट्रेट और सीएमओ की संयुक्त जांच के आधार पर किया गया।
डीएम ने शनिवार को जांच कराई थी। बच्चे को इंजेक्शन लगाने के समय इमरजेंसी में तैनात डॉ. चमन प्रकाश, फार्मासिस्ट मनोज कुमार और वार्ड बॉय विपिन भटनागर की ड्यूटी थी। इन कर्मचारियों के बयान जांच समिति ने दर्ज किए थे। पीड़ित परिवार के भी बयान लिए गए थे। इसी जांच रिपोर्ट को सीएमओ ने निदेशक को भेजा था।
गांव मूसापुर निवासी अबुल हसन के चार वर्षीय बेटे अदीब को 21 सितंबर की दोपहर सांप ने डस लिया था। हालत बिगड़ने पर परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। इमरजेंसी वार्ड में तैनात फार्मासिस्ट मनोज कुमार ने बच्चे को एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगा दिया।
जबकि परिजनों ने दावा किया था कि सांप डसने की जानकारी दी गई थी और एंटी वेनम इंजेक्शन नहीं लगाया गया था। इसके बाद से बच्चे की हालत बिगड़ी हुई है। हसीना बेगम अस्पताल में बच्चा वेंटीलेटर पर है। पीड़ित पिता का कहना है कि वह अपने बच्चे के उपचार में करीब दो लाख रुपये खर्च कर चुके हैं। हालत में सुधार नहीं हो पा रहा है। आगे कहा कि फार्मासिस्ट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जानी चाहिए। बच्चा जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। जिम्मेदारों ने औपचारिक कार्रवाई की है। इसमें सभी जिम्मेदारों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजेंद्र सैनी ने बताया कि निदेशक के आदेश पर फार्मासिस्ट को निलंबित कर दिया गया है। अन्य किसी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश नहीं मिले हैं। अब अन्य की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। जबकि इमरजेंसी वार्ड में यह लापरवाही ड्यूटी के दौरान हुई है।
पर्चा बना, एंटी रेबीज इंजेक्शन लगा और दर्द की दवाई भी दी लेकिन डॉक्टर के हस्ताक्षर नहीं मिले : जिला अस्पताल में बच्चे को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाना तो बड़ी लापरवाही सामने आई थी। अब सिटी मजिस्ट्रेट और सीएमओ ने जो जांच की। उसमें भी कई लापरवाही उजागर हुई हैं।
बच्चे का इमरजेंसी ओपीडी रजिस्टर में पंजीकरण हुआ और पर्चा संख्या 197927 जारी हुआ था। परंतु पर्चे पर किसी चिकित्सक के हस्ताक्षर नहीं थे। फार्मासिस्ट मनोज कुमार सिंह ने अपने स्तर से दवा/इंजेक्शन दिए और उसे एंटी रेबीज वैक्सीन के लिए भेजा। बच्चे को तत्काल चिकित्सकीय पर्यवेक्षण में रखने की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था।