संभल। संभल जिले से गुजर रहे गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण कार्य करा रही कार्यदायी संस्था की ओर से परमिशन की आड़ में अवैध खनन कर लिया। इसकी जानकारी प्रशासन को हुई तो अब रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अवैध खनन के मामले में कार्रवाई की जाएगी। गौर करने वाली बात यह है कि जहां की परमिशन कराई गई है वहां से खनन अभी तक नहीं किया गया है। यह खनन बसला गांव के रकबे में कराया गया। जांच पड़ताल के बाद स्पष्ट हुआ कि कुल छह किसानों के खेत से 28 हजार 335 घन मीटर अवैध खनन कराया गया है।
प्रशासन को इस मामले की जानकारी तब हुई थी, जब औद्योगिक गलियारे के लिए भूमि चिन्हित करने राजस्व टीम मौके पर पहुंची। टीम ने इसकी रिपोर्ट बनाई है। अपर जिलाधिकारी इस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई तय करेंगे। दरअसल 20 अक्तूबर को राजस्व टीम गांव खिरनी और बसला में औद्योगिक गलियारे के लिए चिन्हित भूमि का स्थलीय सत्यापन कर रही थी। इस दौरान सामने आया कि राधेश्याम, रामरतन और ऋषिपाल पुत्र सियाराम निवासी खिरनी मोहिउद्दीनपुर के गांव में स्थित गाटा संख्या 223, प्रमोद कुमार और सूरजमुखी पत्नी स्वर्गीय बलधारी के बसला में स्थित गाटा संख्या 658 जबकि रामेश्वर के गाटा संख्या 956 वाले खेत में से 1.5 मीटर गहराई तक अवैध खनन किया गया। इन तीनों गाटों की जमीन औद्योगिक गलियारे के लिए प्रास्तावित हैं। इन गाटाें से 28 हजार 335 घन मीटर अवैध खनन किया गया है। मौके पर जो खनन किया गया है, उस पर जुर्माने की धनराशि करीब 8 लाख रुपये बनेगी।
अवैध खनन न लगे, इसके लिए कराई थी परमिशन
कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधि ने शासन के इस ड्रीम प्रोजेक्ट की आड़ में परमिशन का भी खेल खेला। किसी को अवैध खनन न लगे, इसके लिए बाकायदा अवैध खनन के लिए निर्धारित शर्तों के आधार पर बसला में ही गाटा संख्या 844 पर 9000 घन मीटर मिट्टी उठाने के लिए परमिशन कराई थी। जहां परमिशन कराई गई है वहां से खनन नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि परमिशन की आड़ में दूसरे किसानों के खेतों से अवैध खनन किया गया है।
171 हेक्टेयर जमीन पर बनेगा औद्योगिक गलियारा, स्वीकृति मिल चुकी है
जहां शासन ने औद्योगिक गलियारा बनाने के लिए स्वीकृति दी है। वहां की जमीन पर ही यह अवैध खनन किया गया है। काफी समय पहले प्रशासन की ओर से 171 हेक्टेयर जमीन चिन्हित कर शासन को प्रस्ताव भेजा था। प्रस्ताव को शासन ने मंजूरी दी और सत्यापन रिपोर्ट भेजने के लिए कहा। जिसके बाद जमीन को किसानों से क्रय किया जा सके। इस सत्यापन के दौरान ही अवैध खनन का मामला सामने आया है। दरअसल जहां औद्योगिक गलियारे के लिए जमीन स्वीकृत हुई है वहां खनन नहीं किया जा सकता है।