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...आखिर घर छोड़ने को मजबूर हो ही गए तुर्तीपुर इल्हा के लोग, जलभराव हुआ जानलेवा

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संभल के तुर्तीपुर इल्हा का जलभराव से यह हाल है इसलिए लोग घरों को छोड़ कर चले गए हैं। - फोटो : SAMBHAL
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संभल। गरीबों की कौन सुनता है। चुनाव आता है तो राजनीतिक लोग खूब आते हैं। अब हम पानी में घिरे हुए हैं तो कोई मददगार नहीं हैं। घर बैठने का डर सता रहा है। जहरीले कीड़े घरों में आ रहे हैं। चारों ओर गंदगी और दुर्गंध है। इसलिए घर छोड़कर चले जाना ही बेहतर है। यह कहना था संभल नगर के मोहल्ला तुर्तीपुर इल्हा के लोगों का जो तालाब में तब्दील हो चुके मोहल्ले से दूसरे मोहल्लों का रूख कर रहे हैं।
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रविवार को अमर उजाला की टीम ने मोहल्ला तुर्तीपुर इल्हा के हालात देखे। जहां न पीने योग्य पानी है और न घर से निकलने का रास्ता। चारों ओर पानी ही पानी है। मानो किसी तालाब में लोगों ने घर बना लिए हों। इसलिए वहां के दो दर्जन परिवार घर छोड़कर जाने को मजबूर हो गए हैं। जो लोग पानी के बीच रह रहे हैं वे बीमार हैं और नगर पालिका की लापरवाही का रोना रो रहे हैं।
दरअसल जलभराव की समस्या से लोग बेहाल हो गए हैं। क्योंकि जलभराव और गंदगी से लोगों में बीमारी फैलने लगी है। किसी अनहोनी के अंदेशे से लोग नगर के दूसरे मोहल्लों में जाकर किराए के मकानों में रह रहे हैं। वहीं लोगों का कहना है कि नगर पालिका से दर्जनों बार समाधान की गुहार लगा ली लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। जबकि जलभराव और गंदगी से बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया। इसलिए ज्यादातर परिवार घर छोड़कर चले गए हैं।
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इन लोगों ने घर छोड़ दिए हैं
संभल। नगर के मोहल्ला तुर्तीपुर इल्हा के शानू, कामिल, कल्लू, रिजवान, इरफान, कफील, नूर, बिलकीस, शकील, सुल्तान, इमरान, अकील, लईक, जरीफ अपने परिवारों को साथ लेकर नगर के दूसरे मोहल्लों में किराए के मकानों में रह रहे हैं। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि जो लोग घरों को छोड़कर गए हैं इनके परिवारों में बीमारी फैल गई थी और घर बैठने का डर सता रहा था। कुछ लोगों के मकान के कुछ हिस्से गिरे भी। इसलिए इन्होंने घर छोड़ना ही बेहतर समझा।
जलभराव में डूबने से मासूम बालक की हो चुकी है मौत
संभल। तुर्तीपुर इल्हा निवासी शकील के 12 वर्षीय बेटे सलमान की नौ माह पहले पानी में डूबने से मौत हो चुकी है। उस समय लोगों ने काफी हंगामा बरपाया लेकिन समाधान तब भी नहीं हुआ। मासूम की मौत की सूचना पर उप जिलाधिकारी समेत कई अधिकारी पहुंचे थे। लोगों की समस्या पर दुख जताया था और समाधान का आश्वासन दिया था लेकिन इतना समय बीत गया और कोई समाधान नहीं किया गया। अब लोगों में अफसर और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ रोष है।
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