मंगलवार को लियाकत की मौत हो गई। लियाकत के बेटे सद्दाम ने बताया कि पिता को सात माह पहले डेंगू हुआ था। चंदौसी के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद बेहतर इलाज के लिए बुलंदशहर के निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया था। सद्दाम ने बताया कि बुलंदशहर अस्पताल से दवा लेने गए थे। भर्ती करने की गुहार लगाई। लेकिन पांच सौ हजार रुपये के नोट लेने से इंकार करते हुए इलाज नहीं किया गया। थक हारकर गांव वापस आ गए। बैंक से नकदी के लिए भी बहुत मशक्कत की। लेकिन धनराशि नहीं मिल सकी। धनराशि के अभाव में लियाकत की मौत हो गई। इससे परिजनों में कोहराम मच गया।