बारिश और हवा से धान की फसलें खेतों में बिछीं
संभल। बीते एक सप्ताह से हो रही बारिश के साथ हवा से धान की फसल को काफी नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि समय पर बारिश न होने के कारण सूखे की मार से उबरे भी न थे कि अब एक सप्ताह से हवा के साथ हो रही बारिश की मार से धान की फसल को भारी नुकसान होने की आशंका बनी है। किसानों ने नुकसान के आधार पर सरकार से मुआवजे की मांग की है। ताकि अधिक नुकसान वाले किसानों को कुछ भरपाई हो सके।
इन दिनों रुक-रुक बारिश हो रही है। धान, उड़द और बाजरा की फसलों में बरसात का पानी भर गया है। शनिवार की सुबह धूप को देखकर किसानों ने राहत की सांस ली थी लेकिन दोपहर बाद अचानक फिर से आसमान में काले घने बादल छाने लगे, जिसके बाद किसान चिंतित हो उठे। साकिन शोभापुर मिलक में 40 बीघा धान की फसल की कटाई कर दी गई थी। चार दिन से हो रही रुक-रुक के बरसात का पानी खेत में भरने से फसल डूब गई है। अब यदि और बरसात होती है तो धान की फसल पूरी तरीके से बर्बाद हो जाएगी। मतावली पट्टी जग्गू गांव के किसान अनिल ने बताया कि पांच बीघा धान की फसल तैयार की थी। बारिश के साथ हवा चलने से फसल खेत में बिछ गई है। टांडा कोठी के ओमप्रकाश ने बताया कि बड़ी उम्मीदों के साथ धान की फसल लगाई थी, लेकिन एक सप्ताह के अधिक समय से रुक रुक कर हो रही बारिश ने फसल को बर्बाद कर दिया। जो फसलें बचीं हैं वह पानी में डूबे रहने से खराब हो जाएगी। इससे धान की पैदावार कम होने की आशंका बनी है। जिससे किसानों को नुकसान होना तय है।
40 बीघा धान की फसल की कटाई 19 सितंबर को की थी। जिसके बाद से लगातार बारिश हो रही है। खेत में बारिश का पानी भर गया है। इससे धान की फसल डूब हो गई है। तीन दिन से धान की फसल पानी में डूबने से फसल फिर से अंकुरित दिखने लगी है। जिससे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
राजेश कुमार, किसान, साकिन शोभापुर मिलक
रुक-रुक कर हो रही बरसात ने चिंता बढ़ा दी है। अगर तेज आंधी आ गई तो अब धान और बाजरे की फसल बचाना मुश्किल हो जाएगा। अब तक 16 बीघा धान की फसल 60 प्रतिशत तक बर्बाद हो चुकी है। जिला प्रशासन और सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है।
सत्येंद्र यादव, किसान, सिहावली
आठ बीघा का धान की फसल लगाई थी, जो कि एक सप्ताह बाद कटाई होनी थी, लेकिन इससे पहले ही बरसात आफत बनकर आ गई है। जिससे पचास प्रतिशत धान की फसल नष्ट हो चुकी है। शासन प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
सत्यवीर सिंह यादव, किसान, बंजरपुरी