चंदौसी(संभल)। शहर के लिए समस्या बने ई-रिक्शा न सिर्फ सवारियों को लाने व ले जाने का काम कर रहे हैं बल्कि लोड वाहनों की तरह ही सामान ढोने का काम भी कर रहे हैं। लोहे की सरिया लादकर ले जाते समय कई बार हादसे भी हो चुके हैं, लेकिन इनपर प्रतिबंध नहीं लग सका। खास बात यह है कि दस साल के बच्चों से लेकर 70 साल के बुजुर्ग तक बिना लाइसेंस के सड़कों पर ई-रिक्शा सरपट दौड़ा रहे हैं। हालांकि शहर के कुछ हिस्से में ई-रिक्शा के लिए वन-वे व्यवस्था कर दिए जाने से दुकानदारों व आम लोगों को कुछ हद तक राहत मिली है।
शहर की बात करें तो यहां ई-रिक्शा की संख्या पांच हजार से ऊपर है। हालांकि न तो नगर पालिका के पास सही आंकड़ा है और न ही परिवहन विभाग के पास इसकी सही जानकारी है। आए दिन हादसे का सबब बन रहे ई-रिक्शा को लेकर जब भी अभियान चला केवल औपचारिक होकर रह गया। न ड्राइविंग लाइसेंस और न ही वाहन का रजिस्ट्रेशन, फिटनेस की तो बात करना ही बेमानी है। बच्चों और बुजुर्गाें के हाथों में हैंडल कभी भी हादसे का सबब बन सकता है, लेकिन इन पर आज तक कोई सार्थक कार्रवाई नहीं की गई। बाजार का आलम यह है कि ई-रिक्शा के कारण पैदल निकलना भी दुश्वार हो जाता है। ऐसा कोई रोड नहीं जिस पर इन तिपहिया वाहनों के कारण जाम न लगता हो।
ऐसा नहीं कि यह ई-रिक्शा केवल सवारियां ढोने का काम करते हैं, भारी लोड वाला सामान भी ढोने के काम में लगे हैं। इन ओवरलोड वाहनों के पलटने की घटनाएं आम हो गई हैं। इसके साथ ही लो की सरिया व एंगल लादकर चलने वाले ई-रिक्शा में दस फीट आगे और इतनी ही पीछे निकली होने के कारण आगे और पीछे चलने वालों के लिए खतरा रहता है।
यातायात प्रभारी दुष्यंत चौधरी का कहना है कि शहर के प्रमुख मार्गों पर ई-रिक्शा के लिए वन-वे व्यवस्था कर दी गई है। उन्होंने यह भी कहा है कि चेकिंग अभियान के दौरान सैकड़ों तिपहिया वाहनों का चालान किया गया है। कई को सीज भी किया गया है। चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि लोहे के सरिया आदि सामान लादकर चलने वाले ई-रिक्शा को सीज करने की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।