चंदौसी(संभल)। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संभल स्थित चंदौसी ने भाजपा नेता प्रेमपाल मामले में सीओ डॉ. प्रदीप कुमार समेत दस पुलिस कर्मियों के खिलाफ जांच के आदेश किए गए हैं। चार फरवरी तक पुलिस को जांच रिपोर्ट न्यायालय में पेश करनी होगी। पुलिस की लापरवाही और भाजपा नेता के झूठे षड्यंत्र में तीन बेगुनाहों को 40 दिन तक जेल में रहना पड़ा था। पुलिस के अधिकारियों से न्याय न मिलने पर पीड़ितों ने कोर्ट की शरण ली।
नगर के भाजपा नेता व राशन डीलर प्रेमपाल सिंह को 27 जुलाई 2024 की रात बहजोई से लौटते समय पतरौआ के समीप गोली मारने की घटना सामने आई थी। इसी रात पुलिस ने लोधियान मोहल्ला के दिलीप, हेमंत और श्यामलाल को गोली मारने के आरोप में घर से गिरफ्तार कर लिया। चंदौसी कोतवाली में तीन दिन तक इन्हें प्रताड़ित किया। फिर जंगल में ले जाकर अपने पास से दिलीप के हाथ में तमंचा देकर वीडियो बनाया और जबरन जुर्म कबूल कराया। इसके बाद में तीनों को जेल भेज दिया।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आदेश पर दोबारा जांच हुई। सामने आया कि भाजपा नेता ने षड्यंत्र के तहत बेगुनाहों को फंसाने के लिए गोली इन्प्लांट कराई थी। पुलिस की लापरवाही से बेगुनाहों को 40 दिन तक जेल में रहना पड़ा। जमानत पर छूटे दिलीप, हेमंत और श्याम लाल ने पुलिस के जुर्म की कहानी बयां की। परिजनों ने दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की मांग की, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। कार्रवाई के नाम पर सीओ डॉ़. प्रदीप कुमार को गुन्नौर स्थानांतरित कर दिया। साथ ही अधिकारी पीड़ितों पर कार्रवाई न करने का दबाव बनाते रहे।
इसके बाद पीड़ितों ने न्यायालय की शरण ली। पूर्व में न्यायालय ने मामले का संज्ञान लेकर तत्कालीन सीओ डॉ प्रदीप कुमार, एसआई रामकुमार सिंह, मियाजान खां, प्रशांत मलिक, मुख्य आरक्षी भूदेव राज, दीपांशु, केशव कुमार, विनोद कुमार, प्रज्ज्वल के खिलाफ जांच के आदेश दिए। जांच रिपोर्ट 13 जनवरी को न्यायालय में पेश करने के आदेश दिए थे। जांच रिपोर्ट नहीं पेश की गई। जिससे न्यायालय ने 24 जनवरी को फिर से एसपी को पत्र जारी कर चार फरवरी तक रिपोर्ट न्यायालय में पेश करने के आदेश दिए हैं।