चंदौसी। जिले के 1770 शिक्षा मित्रों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। उन्हें दस हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता है। लेकिन बीएसए, बीईओ कार्यालयों में लिपिकों की लापरवाही के कारण पिछले दो महीने से वो भी नहीं मिला। शासन से ग्रांट प्राप्त हो जाने के बावजूद अभी तक शिक्षा मित्र बैंक शाखाओं और बीएसए कार्यालय के चक्कर काटने को विवश हैं।
शिक्षा मित्रों का सहायक अध्यापक समायोजन रद्द होेने के बाद अब शिक्षा मित्रों को प्रदेश शासन ओर से दस हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाता है। संभल जिले में कुल 1770 शिक्षा मित्र कार्यरत हैं, जो परिषदीय स्कूलों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। बताते हैं कि इनके खाते प्रथमा बैंक शाखाओं में थे, लेकिन प्रथमा बैंक का पंजाब नेशनल बैंक में विलय हो जाने के बाद खाता नंबर बदल गए हैं। जिसके कारण उनका मानदेय उनके खातों में नहीं आ पाया। बैंक शाखाओं ने अपडेट किए गए खाता नंबरों को खंड शिक्षा अधिकारियों के कार्यालयों को उपलब्ध करा दिया है।
इसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों से शिक्षा मित्रों के बिल बनकर बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय जाने हैं। तब कहीं शिक्षा मित्रों को मानदेय जारी किया जाता है लेकिन बिल बनाने में बीईओ कार्यालय के लिपिक अनावश्यक देरी करते हैं। शिक्षा मित्रों ने बताया कि बीएसए कार्यालय का एक लिपिक तो शिक्षा मित्रों को अनावश्यक रूप से काफी परेशान करता है। जिसकी जानकारी बीएसए को भी है लेकिन उसके सियासी रसूख के कारण लिपिक से कोई कुछ कह नहीं पा रहा है।
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के जिलाध्यक्ष गिरीश यादव ने बताया कि जुलाई और अगस्त माह का मानदेय शीघ्र दिलाने के लिए कई बार बीएसए से मिलकर गुहार लगाई है। लेकिन उनके कार्यालय का एक लिपिक अनावश्यक रूप से 1770 शिक्षा मित्रों के मानदेय को लटकाए हुए है। खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों के लिपिक भी बिल बनाकर भेजने में अनावश्यक देरी करते हैं।
जबकि बीएसए ने लिखित आदेश दिए हैं कि हर माह की पहली तारीख को ही बिल तैयार होकर पहुंचा दिए जाएं। लेकिन यह बिल दूसरे महीने में भी मुश्किल से पहुंच पाते हैं। शासन से शिक्षा मित्रों की ग्रांट जिले को कई दिन पहले ही प्राप्त हो चुकी है।