बहजोई (संभल)। कांच फैक्टरी की जमीन पर बने मकानों को हाईकोर्ट के आदेश पर खाली कराकर सील लगाने के बाद बृहस्पतिवार को ऑफिशियल लिक्विडेटर की टीम ने निरीक्षण किया। टीम ने अपनी सील लगाई है।
बृहस्पतिवार की दोपहर करीब सवा बजे ऑफिशियल लिक्विडेटर की टीम अवैध कब्जे वाले मकानों पर पहुंची और टीम ने तहसीलदार धीरेंद्र कुमार समेत राजस्व कर्मियों की मौजूदगी में एक-एक कर सभी मकानों पर अपनी सील लगाई। करीब ढाई घंटे तक किए गए निरीक्षण व मकानों पर सील लगाने के बाद ऑफिशियल लिक्विडेटर की टीम वापस लौट गई। इस बीच पुलिस की मौजूद रही।
मालूम हो बुधवार की सुबह पुलिस-प्रशासन की टीम ने 84 मकान और प्लॉट पर सील की कार्रवाई शुरू की थी। सभी मकान खाली करा दिए गए हैं। सील लगाकर नोटिस लगा दिया है। यह कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस-प्रशासन द्वारा की गई है। 1984 में हुए कब्जे हटाने के लिए याचिका दायर की गई थी। उसी याचिका के क्रम में यह कार्रवाई की गई है।
नहीं गए शेल्टर होम, खुले में बसेरा
बहजोई। हाईकोर्ट के आदेश पर कांच फैक्टरी पर बने मकानों को खाली कराने के बाद सील लगा दी। मकान खाली करने के बाद सैकड़ों लोगों ने रात में सड़क पर खाना बनाया। साथ ही परिवार की साथ खुले आसमान के नीचे रात बिताई।
बुधवार को कांच फैक्टरी की जमीन से मकान खाली होने व बिजली आदि की आपूर्ति कटने के बाद सभी लोगों ने बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे सोकर रात काटी। आसपास के मोहल्ले वालों की ओर से की गई व्यवस्था के बाद सड़क पर मेज व बैंच आदि डालकर खाना खाया। यह बात दीगर है कि मकान खाली होकर राजस्व विभाग की ओर से सील लगाते समय तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने सभी लोगों को चंदौसी स्थित शेल्टर होम में आश्रय दिलाए जाने की बात कही थी। बावजूद इसके लोगों का कहना था कि घर के पूरे सामान को लेकर चंदौसी के शेल्टर होम में कैसे जाया जा सकता है। यदि सामान यहां छोड़कर जाएं तो सामान की रखवाली नहीं हो पाएगी। वहीं बृहस्पतिवार को शाम तक कई मकानों के बाहर ऐसा ही आलम रहा। बेघर हुए लोगों का सामान घर के बाहर सड़क पर रखा था और लोग वहीं सड़क पर पड़े फर्नीचर व मकान के चबूतरे आदि पर खाना बनाते व खाते नजर आए।